◆ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर भाजपा नेताओं ने किया पलटवार
◆ बयान को लेकर भाजपा में दिखा आक्रोश, इसको बताया राजनीतिक मर्यादा के विरुद्ध,
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर भाजपा नेताओं ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा नेताओं ने बयान को राजनीतिक मर्यादा के विरुद्ध बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से देश से माफी मांगने के लिए कहा। टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के नेताओं ने कहा कि वैचारिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक मर्यादाओं को निशाना बनाना किसी भी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को शोभा नहीं देता।
विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से ऐसी भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियों और निर्णयों का विरोध करने के लिए कांग्रेस के पास ठोस तर्क होने चाहिए, न कि ऐसे शब्द जो राजनीतिक संस्कारों पर सवाल खड़े करें। जनता सब देख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब भी देगी।
भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष स्वाभाविक है, लेकिन राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत कटाक्ष और पारिवारिक टिप्पणियों तक ले जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यही उसकी राजनीतिक संस्कृति है। उन्होंने खड़गे से अपनी टिप्पणी वापस लेने और देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन इस अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। जब किसी राष्ट्रीय दल का शीर्ष नेता सार्वजनिक मंच से ऐसी टिप्पणी करता है, तो उसका प्रभाव व्यापक होता है। कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में केवल बचाव करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और राजनीतिक संवाद की गरिमा बनाए रखने के लिए स्पष्ट संदेश देना चाहिए।
जिला मीडिया प्रभारी अमित मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति का संकट यह है, वह नीतिगत बहस के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों को राजनीतिक हथियार बनाने लगी है। लोकतंत्र में शब्दों की ताकत तर्क, तथ्य और विचारों में होती है, न कि कटाक्ष और अभद्रता में। कांग्रेस अध्यक्ष को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।