◆ यूपी के 16 जिलों के साथ कई राज्यों के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां, शोभायात्रा में भी दिखेगा लोककला का वैभव
अयोध्या। दीपोत्सव-2026 में इस बार रामनगरी केवल दीपों की जगमगाहट से ही नहीं, बल्कि देशभर की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं से भी रोशन होगी। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले कलाकार पारंपरिक लोकनृत्य, लोकसंगीत और वादन के जरिए अपनी क्षेत्रीय पहचान को मंच देंगे। मथुरा के मयूर नृत्य से लेकर झारखंड के पुरुलिया छऊ, राजस्थान के घूमर और बिहार की झिझिया तक की प्रस्तुतियां उत्सव को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर करेंगी।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक विधाओं को दीपोत्सव का हिस्सा बनाया गया है। मथुरा के कलाकार मयूर और बम रसिया नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जबकि प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा और सोनभद्र का मांदल-सिंघा व करमा नृत्य दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होगा। अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही, डमरू और शंख नृत्य के जरिए स्थानीय परंपराओं की छटा बिखेरेंगे।
इसके अलावा गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी अपनी विशिष्ट शैली में लोक संस्कृति का परिचय देंगे।
दीपोत्सव में दूसरे राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी विविधता का विस्तार करेंगी। पश्चिम बंगाल के कलाकार श्री खोल, ओड़िशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन प्रस्तुत करेंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी आयोजन का हिस्सा होंगे। राजस्थान का घूमर-चरी, बिहार की झिझिया तथा चेन्नई के कलाकारों के कावड़ी, कड़गम और मयूर नृत्य के साथ आंध्र प्रदेश का बोनालू भी दर्शकों को देश की अलग-अलग लोक परंपराओं से परिचित कराएगा।
शोभायात्रा में भी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव की रौनक बढ़ाएंगे। प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल-सिंघा और अयोध्या का बधावा नृत्य इसमें शामिल रहेगा। आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन प्रस्तुत करेंगे।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। वहीं अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि दीपों की आभा के साथ लोकनृत्य और लोकसंगीत की प्रस्तुतियां रामनगरी को सांस्कृतिक संगम का स्वरूप देंगी।
आयोजन का एक उद्देश्य पारंपरिक लोककलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकारों की भागीदारी से दीपोत्सव भारतीय संस्कृति की विविधता के साथ उसकी एकता और साझा परंपराओं का संदेश प्रसारित करेगा।