◆ जय प्रताप गुप्ता बोले- प्रारंभिक अर्हता परीक्षा के लिए 400 से 600 किलोमीटर दूर केंद्र देना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय
अयोध्या। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) में अभ्यर्थियों को उनके निवास स्थान से 400 से 600 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर राष्ट्रीय छात्र संगठन के अध्यक्ष जय प्रताप गुप्ता ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इस व्यवस्था को अभ्यर्थियों के लिए अनावश्यक परेशानी और आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला बताते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की।
जय प्रताप गुप्ता ने कहा कि पीईटी केवल प्रारंभिक अर्हता परीक्षा है। इसे उत्तीर्ण करने से किसी अभ्यर्थी को सीधे नौकरी नहीं मिलती, बल्कि आगे की भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने की पात्रता मिलती है। इसके बाद भी अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया के कई चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसी परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिकांश विद्यार्थी सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों से आते हैं। गरीब, मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना आसान नहीं है। आने-जाने और ठहरने का अतिरिक्त खर्च कई विद्यार्थियों की क्षमता से बाहर है। इसी कारण कुछ अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होने से भी वंचित रह गए।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने वाले विद्यार्थियों को भी बसों और ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान उन्हें जानवरों की तरह ठूंसकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे अभ्यर्थियों को शारीरिक कष्ट के साथ मानसिक तनाव और असुरक्षा भी झेलनी पड़ी।
जय प्रताप गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब पीईटी उत्तीर्ण करने के बाद भी सीधे रोजगार नहीं मिलता तो प्रारंभिक परीक्षा के लिए इतनी लंबी दूरी तय कराने की आवश्यकता क्या है? क्या परीक्षा व्यवस्था तैयार करते समय आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की परिस्थितियों का ध्यान नहीं रखा जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था छात्र हितों के प्रति सरकार और परीक्षा एजेंसियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रीय छात्र संगठन अध्यक्ष ने सरकार और यूपीएसएसएससी से मांग की कि अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद अथवा नजदीकी जिलों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाएं। जिन अभ्यर्थियों को अत्यधिक दूर केंद्र दिए गए हैं, उनके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही दूरी और आर्थिक कठिनाइयों के चलते परीक्षा में शामिल नहीं हो सके अभ्यर्थियों को एक और अवसर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए। केवल एक अर्हता परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा, अतिरिक्त आर्थिक खर्च और मानसिक परेशानी उठाने के लिए विवश करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने चाहिए।