Tuesday, July 7, 2026
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राम मंदिर कार्यक्रमों में 124 करोड़ रुपये खर्च होना जनता के पैसे की खुली लूट : प्रमोद तिवारी


कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार और राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर लगाए गंभीर आरोप


अयोध्या। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष एवं सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के कार्यक्रमों पर 124 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें जन्मभूमि पर ध्वजारोहण के लिए 10 करोड़ रुपये तथा पंडाल लगाने के नाम पर 114 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने इसे जनता के पैसे की खुली लूट और डकैती बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी धनराशि किस आधार पर खर्च की गई, यह समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से इस मामले में न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।

प्रेस विज्ञप्ति में प्रमोद तिवारी ने कहा कि भगवान श्रीराम के दरबार में लूट हुई है और रामभक्तों के विश्वास के साथ धोखा किया गया है। उन्होंने कहा कि धर्म और भगवान श्रीराम के नाम पर जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तथा खुलेआम धन की लूट की जा रही है। उन्होंने रामभक्तों से ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 से वह राम मंदिर आंदोलन को करीब से देखते रहे हैं। पर्यटन मंत्री रहते हुए राम की पैड़ी और श्रीराम कथा पार्क के निर्माण में उनका योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आज जो घटनाएं सामने आ रही हैं, उन्हें देखकर उन्हें बेहद दुख और निराशा हो रही है।

प्रेस विज्ञप्ति में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक का भी उल्लेख करते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि बैठक के बाद सामने आए घटनाक्रम से करोड़ों रामभक्तों को निराशा हुई है। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चढ़ावे में हेराफेरी और बरामदगी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कोषाध्यक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चंपत राय और अनिल मिश्रा का बचाव कर रहे हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा देना क्या एक नाटक था, कानून के जानकार पाराशर ने जब स्पष्ट कह दिया कि एक बार यदि इस्तीफा हो गया तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता वरना इस्तीफा देना भी महज एक नाटक ही था । अंत में उन्होंने दावा किया कि भगवान श्रीराम का मंदिर भारतीय जनता पार्टी ने नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद बना है और भाजपा का इसमें कोई योगदान नहीं है।

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