◆ 14 स्थानों पर बनेंगे अस्थाई चिकित्सा केंद्र, दस प्रमुख स्थलों पर मुस्तैद रहेंगी एंबुलेंस
अयोध्या। दीपोत्सव के दौरान रामनगरी में जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पांच से आठ नवंबर तक चलने वाले दीपोत्सव के मद्देनजर शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों में कुल 50 बेड सुरक्षित रखे गए हैं। वहीं, मेला क्षेत्र में 14 अस्थाई उपचार केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए दस स्थानों पर 108 एंबुलेंस की तैनाती होगी।
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में 20-20 बेड तथा श्रीराम चिकित्सालय में 10 बेड आरक्षित रहेंगे। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार की सुविधा उनके नजदीक ही उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा शिविर भी संचालित किए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित रखने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए एक नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा।
दीपोत्सव के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने के लिए 45 चिकित्साधिकारी, 45 फार्मासिस्ट, 45 वार्ड ब्वाय, छह पर्यवेक्षक और 15 अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। कर्मचारियों को तीन पालियों में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रत्येक पाली आठ घंटे की होगी, जिससे पूरे आयोजन के दौरान चिकित्सा सेवाएं लगातार उपलब्ध रहें।
श्रद्धालुओं की अधिक आवाजाही वाले हनुमानगढ़ी, कारसेवकपुरम, कनक भवन मंदिर परिसर, श्रीराम जन्मभूमि के निकास द्वार और नागेश्वरनाथ मंदिर सहित दस प्रमुख स्थानों पर एंबुलेंस तैनात रहेंगी। किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने या दुर्घटना की स्थिति में उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। चिकित्सा इंतजामों की निगरानी और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी उपमुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राममणि शुक्ला को मेला अधिकारी के रूप में सौंपी गई है।
14 स्थानों पर मिलेगी प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा
दीपोत्सव मेला क्षेत्र में 14 स्थानों पर अस्थाई उपचार केंद्र बनाए जा रहे हैं। इनमें कंट्रोल रूम, पक्का घाट पर आठ बेड का अस्थाई चिकित्सालय, लता मंगेशकर चौक, साकेत पेट्रोल पंप, हनुमानगुफा, श्रीराम जन्मभूमि निकास द्वार, श्रीराम जन्मभूमि पीएफसी, दशरथ महल, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, कारसेवकपुरम, नागेश्वरनाथ मंदिर, हनुमानगढ़ी और कनक भवन मंदिर परिसर शामिल हैं। इन केंद्रों के जरिए श्रद्धालुओं को आवश्यकता पड़ने पर मौके पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।