अयोध्या। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि युवाओं, विशेषकर युवतियों में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और ग्लैमर इंडस्ट्री से जुड़ी युवतियों में धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि तंबाकू में मौजूद निकोटिन मस्तिष्क में डोपामिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ाता है, जिससे कुछ समय के लिए आनंद और सुकून का अनुभव होता है। धीरे-धीरे शरीर इसकी आदत डाल लेता है और व्यक्ति निकोटिन पर निर्भर होने लगता है। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार तंबाकू सेवन करने वाले लगभग दो-तिहाई लोगों में इसकी शुरुआत किशोरावस्था में ही हो जाती है।
उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन के शुरुआती दुष्प्रभावों में एकाग्रता की कमी, पढ़ाई में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या और व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। लंबे समय तक तंबाकू सेवन करने से कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फेफड़ों और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि बिहेवियर थेरेपी और निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद से तंबाकू की लत से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से तंबाकू उत्पादों के आकर्षक विज्ञापनों और पैकेजिंग के झांसे में न आने की अपील की।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, नाबालिगों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर प्रतिबंध को लागू किया जा रहा है।