Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या रील्स की लत से बढ़ रही कामुक कल्पनाओं की गिरफ्त

रील्स की लत से बढ़ रही कामुक कल्पनाओं की गिरफ्त

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◆ शादीशुदा व बुजुर्ग भी  हैं रील-फैंट्सी से आसक्त


◆ फैंट्सी-वर्ल्ड की आसक्ति से रहें सजग


 अयोध्या। सामयिक रील-इंड्यूस्ड सेक्सुअल-फैंट्सी डिसऑर्डर विषयक  जागरूकता वार्ता में जिला चिकित्सालय के मनो परामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन  ने बताया कि सोशल मीडिया की रील अब सेक्सुअल-फैंट्सी ऑब्सेशन-एसएफओ यानी कामुक-कल्पना आसक्ति बनती जा रही है।


डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

इसके शिकार लोग सोशल-मीडिया के यौनोत्तेजक-रील्स से आसक्त होकर कामुक-फन्तासी या सेक्सुअल डे-ड्रीमिंग के शिकार हो वास्तविक जीवन के रोमांच व आनंद से दूर होते जा रहे हैं और रील्स को देख व कमेंट आदि से आभासी आनंद प्राप्त कर रहे हैं । इतना ही नही, रील-एक्टर से पहुंच बनाने से लेकर इंटीमेट होने तक का जूनून ऑनलाइन ऑडियो-विजुअल चैटिंग या सेक्स्टिंग के रूप मे दिख रहा है। यह लत अविवाहित लोगों तक ही सीमित न होकर शादीशुदा लोगों में भी दिख रही है। रील-जनित सेक्सुअल-फैंट्सी की दखल दाम्पत्य-जीवन में भी दिख रही है, क्योंकि  रील की चकाचौंध में दाम्पत्य-यौनानंद बोरिंग, मोनोटोनस व उबाऊ नज़र आने लगता है। वैसे भी मैरिटल-रिलेशनशिप में धीरे-धीरे यौनाकर्षण स्थाई सुरक्षा और कंफर्ट में बदलने लगती है तथा यौनानंद-रसायन डोपामिन कम तथा आत्मीयता-हार्मोन ऑक्सीटोसिन का लेवल बढ़ता है। युगल या एकल बुजर्ग भी इस लत से ग्रसित हो मनोशारीरिक समस्याओं व सामाजिक उपहास के पात्र बन रहे हैं।  फैंट्सी-वर्ल्ड मे गोता लगाने से रिवॉर्ड-हार्मोन डोपामिन बढ़ता है और उत्तेजक-एहसास ब्रेन के मेमोरी-सेन्टर  हिप्पोकैम्पस मे फीड हो कर इसकी तलब पैदा करता है।

यौन-कल्पना या सेक्सुअल-फैंट्सी यदि सजग व संयमित है, तो  यह सामान्य है क्योंकि फैंट्सी या कल्पनानंद मानव-मन का स्वभाव है। परन्तु यदि इससे व्यक्तिगत, अकादमिक,व्यवसायिक व सामाजिक जीवन  दुष्प्रभावित होने लगे तो  मनोविकार रूप में इसकी पहचान व जरूरी है। इस लत के नशाखोरी, जुआखोरी जैसे डोपामिनर्जिक लत मे बदलने तथा  अवसाद,उन्माद, सुसाइड या होमिसाइड का भी रिस्क होता है ।

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