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ओवरडोज मौत मामले में निर्मला अस्पताल की सफाई पर उठे सवाल,  जवाब कम, विरोधाभास ज्यादा

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◆ बेसमेंट में आईसीयू संचालन नियम विरूद्ध,  स्वीकारोक्ति के बावजूद नहीं दे सके ठोस स्पष्टीकरण, जवाबों से ज्यादा उलझे तर्क


अयोध्या। इंजेक्शन की ओवरडोज से महिला की मौत के गंभीर आरोपों के पांच दिन बाद सामने आए निर्मला अस्पताल के पक्ष ने शंकाओं को कम करने के बजाय और गहरा कर दिया। सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आर.के. बनौधा ने मौत का कारण बीमारी बताते हुए ओवरडोज की बात को साजिश करार दिया, लेकिन उनके बयान विरोधाभासों से भरे नजर आए।


निर्मला अस्पताल का निरीक्षण करते सीएमओ संजीव बानियान ( निरीक्षण उपरांत आईपीडी- नए मरीज भर्ती पर लगी थी रोक )

डॉ. बनौधा ने दावा किया कि महिला की मौत किसी अन्य अस्पताल में हुई और उसी अस्पताल द्वारा जारी डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर वह अपनी बात रख रहे हैं। हालांकि, सवाल यह उठा कि यदि मृत्यु किसी अन्य अस्पताल में हुई थी, तो निर्मला अस्पताल के ईएमओ द्वारा इंजेक्शन ओवरडोज से संबंधित नोट कैसे और क्यों लिखा गया। इस पर डॉ. बनौधा ने कहा कि यह नोट ईएमओ डा संदीप सिंह ने परिजनों के दबाव में लिखा था, लेकिन इतनी गंभीर बात लिखित रूप में देने को लेकर वह कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दे सके।


निर्मला अस्पताल का ईसीयू सील करती स्वास्थ्य विभाग की टीम

प्रेसवार्ता में यह स्वीकारोक्ति भी हुई कि बेसमेंट में आईसीयू का संचालन नियमों के विरुद्ध किया जा रहा था। इसके बावजूद अस्पताल को लगातार फायर एनओसी मिलती रही और हर वर्ष नवीनीकरण होता रहा, जिस पर अस्पताल प्रबंधन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। यह तथ्य अस्पताल की कार्यप्रणाली और नियामक निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करता है।

घटना के बाद लगातार मीडिया से दूरी बनाए रखने के सवाल पर डॉ. बनौधा ने भय का हवाला दिया, जबकि आईएमए अध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि चिकित्सक दबाव में आ जाते हैं। हालांकि, पांच दिन तक चुप्पी और अब सामने आकर पूरे मामले को साजिश बताना, अस्पताल की मंशा पर संदेह को और मजबूत करता है।

प्रेसवार्ता के दौरान चिकित्सक कई सवालों से बचते नजर आए। कभी परिजनों पर दबाव का आरोप लगाया गया, तो कभी किसी अन्य अस्पताल की रिपोर्ट को ढाल बनाया गया। वहीं, यह भी आरोप लगाया गया कि घटना के बाद अस्पताल में आग लगाने की कोशिश की गई थी।


जांच में सहयोग नहीं कर रहे दोनों अस्पताल


स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमओ के नेतृत्व में दो बार निर्मला और सोना अस्पताल पहुंची, लेकिन मौके पर कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं मिला। न तो सोना अस्पताल ने महिला का चिकित्सीय इतिहास सौंपा है और न ही निर्मला अस्पताल ने अब तक जांच समिति को लिखित रूप में अपना पक्ष दिया है।

कुल मिलाकर, प्रेसवार्ता में निर्मला अस्पताल ने अपनी सफाई देने की कोशिश तो की, लेकिन विरोधाभासी बयानों, नियम उल्लंघन की स्वीकारोक्ति और जांच में सहयोग न करने के रवैये ने अस्पताल को और अधिक सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है।


प्रेस वार्ता का वीडियो


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