Friday, August 14, 2026
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अयोध्या में बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी, 18 संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी


◆ 14 बाढ़ शरणालय और 12 बाढ़ चौकियां चिह्नित, 150 से अधिक नाव और 56 राहत टीमें रहेंगी तैनात


अयोध्या । जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। जिले की तीन तहसीलों — सदर, रुदौली और सोहावल — के 18 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इन गांवों में राहत और बचाव कार्यों के लिए 14 बाढ़ शरणालय और 12 बाढ़ चौकियों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा जल पुलिस द्वारा 150 से अधिक नावों को चिन्हित कर स्टैण्डबाई में रखा गया है।

प्रशासन ने राहत सामग्री और लंच पैकेट के वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। तकनीकी टेंडर खोला जा चुका है और वित्तीय प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमों को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।


बीते वर्ष 14 गांवों में पहुंचा था बाढ़ का पानी


पिछले साल जिले के 14 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इस बार भले ही खतरा कम बताया जा रहा हो, लेकिन प्रशासन सतर्क है। जिन गांवों में हर साल पानी भरता है — जैसे सोहावल का माझा कला, रुदौली का कैथी माझा और पूराबाजार के निचले इलाके — वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है।


स्वास्थ्य पशुचिकित्सा टीमें होंगी तैनात


मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा 35 स्वास्थ्य टीमों और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा 21 पशु चिकित्सा टीमों की तैनाती की जा रही है। ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में आपात चिकित्सा सेवा और पशुओं की देखभाल सुनिश्चित करेंगी।


26 जून को होगा मॉकड्रिल


जिले की तीनों बाढ़ संभावित तहसीलों में 26 जून को मॉकड्रिल कर तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा। सोहावल के आदर्श बाढ़ शरणालय में विशेष अभ्यास किया जाएगा जिसमें यह परखा जाएगा कि आठ घंटे के भीतर गांवों को खाली कराने की क्षमता कितनी है।


24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय


जिले का बाढ़ कंट्रोल रूम पूरे साल 24 घंटे सक्रिय रहता है। राजस्व विभाग के कर्मचारी, लेखपाल, होमगार्ड और अन्य सहयोगी टीमें चौकियों पर ड्यूटी में तैनात हैं। मुनादी और अन्य जनसंपर्क माध्यमों से ग्रामीणों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


संवेदनशील क्षेत्रों पर खास नजर


जिला आपदा विशेषज्ञ अधिकारी यथार्थ तिवारी ने बताया कि संवेदनशील गांवों में नदियों के जलस्तर पर नियमित निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर त्वरित राहत और बचाव कार्य किए जाएंगे। बाढ़ शरणालयों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं ताकि लोगों को न्यूनतम परेशानी हो।

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