Wednesday, July 22, 2026
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ओवर थिंकिंग से बढ़ती है चिंता, आत्मचिंतन से मिलती है मानसिक शांति : डॉ. आलोक मनदर्शन


अयोध्या। विश्व चिंतन दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी राजयोग केंद्र में आयोजित मनो-जागरूकता व्याख्यान सत्र में जिला चिकित्सालय के मनो परामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि सही दिशा में किया गया चिंतन व्यक्ति की निर्णय क्षमता और समस्या समाधान की शक्ति को बढ़ाता है, जबकि ओवर थिंकिंग मानसिक रोगों की शुरुआत बन सकती है।

उन्होंने बताया कि आत्मचिंतन से मस्तिष्क के सकारात्मक हिस्से सक्रिय होते हैं, जिससे मन शांत रहता है और व्यक्ति विवेकपूर्ण निर्णय ले पाता है। इसके विपरीत, अत्यधिक चिंता या ओवर थिंकिंग से तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, सिरदर्द, घबराहट, अवसाद और पैनिक अटैक जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि यदि तीन सप्ताह से अधिक समय तक चिंता या नींद की समस्या बनी रहे तो मनो-परामर्श अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक वातावरण में घूमने, ध्यान-योग, प्रार्थना, सत्संग, रचनात्मक कार्यों और पर्याप्त नींद को मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम का संयोजन ब्रह्माकुमारी शशि बेन ने किया। इस अवसर पर राजयोग साधकों की शंकाओं का समाधान भी किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जीवन में संतुलित चिंतन अपनाकर ही तनावमुक्त और सकारात्मक जीवन जिया जा सकता है।

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