अयोध्या। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में बुधवार को चकबंदी कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में चकबंदी न्यायालयों में लंबित वादों के साथ वर्तमान में चल रहे मामलों के निस्तारण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने 10 वर्ष से अधिक पुराने तथा पांच से 10 वर्ष तक लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष अभियान चलाने और प्रभावी सुनवाई के लिए नियमित तारीखें निर्धारित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों में सप्ताह में कम से कम दो दिन सुनवाई की तारीख निर्धारित कर उनके शीघ्र निस्तारण को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही वर्तमान में चल रहे वादों का भी समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि नए मामले अनावश्यक रूप से लंबित न हों।
बैठक में बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया के तहत ग्राम महांवा और जमदरा के अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। महांवा में चकबंदी प्रक्रिया करीब 36 वर्ष से चल रही है। दोनों ग्रामों में सितंबर के अंत तक धारा-52 के प्रकाशन की कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य बताया गया।
जिलाधिकारी ने चकबंदी प्रक्रियाधीन गांवों में प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने तथा निर्धारित समयसीमा में चकबंदी संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (एलओ)/उप संचालक चकबंदी इन्द्राकान्त द्विवेदी, बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोज कुमार सिंह सहित जनपद के चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता मौजूद रहे।