◆ अवध विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य शुभारंभ, 230 शोध पत्र प्रस्तुत
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में सोमवार को भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। 13वीं इंटरनेशनल साइंस कांग्रेस–2025 के अंतर्गत आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह थे।
कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज के विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध, व्यापक और उन्नत रही है। उन्होंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में पूरे ब्रह्मांड का गूढ़ ज्ञान निहित है। यह परंपरा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि विज्ञान, कला, कृषि, समाज और जीवन-दर्शन के प्रत्येक क्षेत्र को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा छात्रों में नैतिकता, अनुशासन, आत्मविश्वास और चरित्र निर्माण का आधार बनती है।
कुलपति ने आधुनिक विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि विकास के नाम पर जल, भूमि और पर्यावरण का अत्यधिक दोहन किया गया है। उन्होंने भारतीय कृषि परंपरा का उदाहरण देते हुए बताया कि प्राचीन काल में फसल की बुवाई और कटाई तक नक्षत्रों व मुहूर्त के अनुसार होती थी, जिसे आज आधुनिक विज्ञान कॉस्मिक एनर्जी के रूप में स्वीकार कर रहा है।
विशिष्ट अतिथि बोत्सवाना विश्वविद्यालय के प्रो. गिरजा शंकर सिंह ने कहा कि विज्ञान, तकनीक और कृषि भारतीय ज्ञान परंपरा के अभिन्न अंग रहे हैं। उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बीएचयू को भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक उदाहरण बताया।
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। इस अवसर पर इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2025 से प्रो. दयानंद, प्रो. संगीता शर्मा, डॉ. कविता गौर, प्रो. विनय कुमार मिश्र एवं डॉ. स्तुति गुप्ता को सम्मानित किया गया। साथ ही कांफ्रेंस की स्मारिका एवं एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
दो दिवसीय कांफ्रेंस में कुल 20 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें 230 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए हैं और बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल हुए हैं। स्वागत उद्बोधन संयोजक प्रो. एस.एस. मिश्र ने किया, संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. फर्रुख जमाल ने प्रस्तुत किया।