Tuesday, July 21, 2026
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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की हत्या मामले में मुख्य आरोपी को फांसी, 9 को उम्रकैद


बहराइच। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बहुचर्चित मामले में गुरुवार को जिला अदालत ने फैसला सुना दिया। अदालत ने घटना में गोली चलाने वाले मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि भीड़ द्वारा पिटाई की गई । 9 दिसंबर 2025 को अब्दुल हमीद, उनके बेटे फहीम, सरफराज, तालिब के साथ इलाके के रहने वाले सैफ, जावेद, जिशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ को दोषी ठहराया गया।अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह फैसला लगभग 13 महीने 28 दिन चली सुनवाई के बाद सुनाया गया। अदालत ने दो दिन पहले कुल 13 आरोपियों में से 10 को दोषी करार दिया था, जबकि तीन आरोपी—खुर्शीद, शकील और अफजल—को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। फैसला सुनाए जाने से पहले सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा में जेल से अदालत लाया गया।

घटना 13 अक्टूबर 2024 की है, जब महराजगंज बाजार में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान दो पक्षों में विवाद बढ़ गया था। पत्थरबाजी और फायरिंग के बीच रामगोपाल मिश्रा अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़ गया। इसी दौरान उसे पहले गोली मारी गई और बाद में भीड़ ने पिटाई कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा और हिंसा फैल गई थी।

पुलिस ने घटना के बाद कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद 11 जनवरी 2025 को आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। मामले में 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई।

अदालत के फैसले के साथ इस मामले के कानूनी पक्ष का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है, हालांकि दोषियों को सजा के खिलाफ निश्चित समयावधि में अपील का अधिकार प्राप्त है।

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