राफ्टिंग का बना अचानक कार्यक्रम, 25 से सिमटा 14 साथियों का दल
✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
ऋषिकेश में गंगा की गोद में राफ्टिंग
कई युवाओं ने इच्छा व्यक्त की कि जब ऋषिकेश इतना निकट है तो वहां विश्वप्रसिद्ध गंगा में राफ्टिंग का आनंद लिए बिना वापस लौटना यात्रा के साथ न्याय नहीं होगा। बात सभी को जच गई और वहीं निर्णय लिया गया कि जो साथी राफ्टिंग करना चाहते हैं, वे अपना नाम सूची में दर्ज करा दें।
सूची बनाने की जिम्मेदारी इन्द्रजीत को दी गई। रात तक ऐसे उत्साही साथियों की संख्या लगभग 25 हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि अगले दिन एक बड़ा दल ऋषिकेश की ओर रवाना होगा, लेकिन अक्सर यात्राओं में उत्साह और वास्तविकता के बीच थोड़ा अंतर आ ही जाता है। सुबह जब छह बजे सभी को तैयार होना था, तब धीरे-धीरे यह संख्या घटने लगी। कोई यात्रा की थकान के कारण रुक गया तो किसी ने अनिक्षा जता दी। अंततः सुबह साढ़े छह बजे तक केवल 14 साथी ही अपने कमरों से निकलकर होटल के हाल में एकत्र हुए।
हरिद्वार से ऋषिकेश तक उत्साह भरा सफर, गंगा तट पर हुआ पंजीकरण
-इस रोमांचक दल में श्रीमती राजलक्ष्मी तिवारी जी, उनकी पुत्री गार्गी, मैं स्वयं, विपिनेश पांडेय, राममोहन पांडेय, अमित विश्वकर्मा, श्रीनिवास शास्त्री, सुनील अवस्थी, इंद्रजीत शुक्ला, निरंकार पाठक, पंकज सिंह, विनोद पाठक, भास्कर राव सहित अन्य साथी शामिल थे। संख्या कम होने के कारण निर्णय लिया गया कि केवल एक वाहन से ही ऋषिकेश चला जाए। सभी साथी उत्साह के साथ वाहन में बैठे और देखते ही देखते हमारा छोटा-सा दल हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर चल पड़ा।
सुबह का समय था। सड़क पर भीड़ अपेक्षाकृत कम थी। रास्ते में गंगा कभी हमारे साथ-साथ बहती दिखाई देती, तो कभी पहाड़ियों के बीच ओझल हो जाती। लगभग आधे घंटे की यात्रा के बाद हम योग और अध्यात्म की राजधानी कहे जाने वाले ऋषिकेश पहुंच चुके थे।
