◆ महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून के पालन न करने पर एक लाख रुपये तक जुर्माने की चेतावनी
अयोध्या। कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा ने जनपद के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी एवं गैर सरकारी संस्थानों को आंतरिक परिवाद समिति (इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी-आईसीसी) का गठन अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में अभी तक समिति का गठन नहीं हुआ है, वे 15 दिनों के भीतर इसकी सूचना जिला प्रोबेशन कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 के तहत ऐसे सभी संस्थानों, कार्यालयों एवं प्रतिष्ठानों, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आईसीसी का गठन अनिवार्य है। इसमें निजी प्रतिष्ठान, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय, बैंक, निगम, उपक्रम, मॉल तथा अन्य संस्थान शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि समिति की अध्यक्ष कार्यस्थल की वरिष्ठ महिला कर्मचारी होंगी। समिति को प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार होगा। प्रथम दृष्टया लैंगिक उत्पीड़न के प्रमाण मिलने पर संबंधित प्रकरण सात दिनों के भीतर पुलिस को भेजा जाएगा। समिति को जांच के दौरान सिविल न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त होंगे तथा जांच प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
जयपाल वर्मा ने बताया कि अधिनियम का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहली बार आईसीसी का गठन न करने पर 50 हजार रुपये तथा दोबारा उल्लंघन पाए जाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लगातार नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित निजी संस्था का पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है।
उन्होंने सभी पात्र संस्थानों से अपील की कि यदि उनके यहां पहले से आंतरिक परिवाद समिति गठित है तो उसकी सूचना भी निर्धारित समयावधि में जिला प्रोबेशन कार्यालय को उपलब्ध कराएं, ताकि अधिनियम के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके।