जलालपुर, अंबेडकर नगर। सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना पर जलालपुर ब्लॉक क्षेत्र के सोहगूपुर गांव में सवाल खड़े हो गए हैं। गांव के कर्बला के पास स्थित अमृत सरोवर की भूमि पर लगे दर्जनों यूकेलिप्टस (लिप्टिस) के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी संपत्ति कटवाकर बेचने का गंभीर आरोप लगाया है।
ग्रामीणों के मुताबिक अमृत सरोवर तालाब के चारों ओर वर्षों से लगे लाखों रुपये कीमत के पेड़ों को रातों-रात कटवा दिया गया। आरोप है कि ग्राम प्रधान अरविंद यादव ने प्रभाव और दबंगई के बल पर अधिकारियों से सांठगांठ कर पेड़ों की कटाई कराई और लकड़ी बेचकर मोटी रकम कमाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। करीब दो सप्ताह पहले गांव के ही एक अन्य तालाब के किनारे लगे यूकेलिप्टस के पेड़ भी कटवाकर बेच दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को जानकारी होने से पहले ही कटे हुए पेड़ मौके से हटा दिए गए थे। अब दूसरे अमृत सरोवर पर भी बड़े पैमाने पर कटान शुरू होने से मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई बिना प्रशासनिक अनुमति संभव नहीं है। ऐसे में पंचायत विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकारी तालाब की भूमि पर खड़े सैकड़ों पेड़ कटते रहे और जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी।
ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य जल संरक्षण के साथ हरित वातावरण तैयार करना था, लेकिन यहां सरकारी संपत्ति को ही लकड़ी माफियाओं की तरह काटकर बेच दिया गया। मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। इस संबंध में एडीओ पंचायत बृजेश कुमार तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और स्थलीय जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।