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भावनात्मक सतर्कता बढ़ाती है परीक्षा उत्पादकता, नींद व ‘हैप्पी हार्मोन्स’ सुधारते हैं प्रदर्शन

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अयोध्या। बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनज़र आयोजित मनोजागरूकता वार्ता में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन के महत्वपूर्ण उपाय बताए। उन्होंने कहा कि परीक्षा के समय हल्का दबाव या स्ट्रेस सकारात्मक हो सकता है, जिसे ‘यू-स्ट्रेस’ कहा जाता है। यह ऊर्जा व उत्साह बढ़ाने वाले हार्मोन नारएड्रेनालिन के संचार से प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होता है।

हालांकि उन्होंने आगाह किया कि जब यही दबाव अधिक बढ़ जाता है तो स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल व एड्रेनालिन की मात्रा बढ़ने से यह ‘डिस्ट्रेस’ या हताशा में बदल जाता है। यह स्थिति मनोशारीरिक स्वास्थ्य व परीक्षा प्रदर्शन दोनों को प्रभावित कर सकती है। इसे एग्जाम-फोबिया, एग्जाम-एंजायटी या एग्जाम-प्रेशर के नाम से भी जाना जाता है।

डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

डॉ. मनदर्शन के अनुसार घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना, नकारात्मक विचार आना, मुंह सूखना, सिर या पेट दर्द, उल्टी-मिचली, हाथ सुन्न होना, नींद में चौंककर उठना, अनिद्रा या अतिनिद्रा, पढ़ा हुआ याद न रहना या कठिन प्रतीत होना जैसे लक्षण परीक्षा तनाव के संकेत हो सकते हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन विद्यार्थियों में अधिक देखी जाती है जिनका आईक्यू अच्छा होता है, लेकिन भावनात्मक लब्धता (ईक्यू) अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे छात्र प्रायः कुशाग्र बुद्धि के होते हुए भी अत्यधिक चिंताग्रस्त रहते हैं।

उन्होंने सलाह दी कि विद्यार्थी अपनी चिंता की मनोदशा के प्रति सजग रहें। अध्ययन के बीच छोटे-छोटे विराम लेकर मनोरंजक गतिविधियों में समय दें तथा पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन करें, क्योंकि मस्तिष्क का बड़ा हिस्सा तरल तत्वों से बना होता है। प्रतिदिन छह से आठ घंटे की गहरी नींद लेना आवश्यक है, जिससे मस्तिष्क को पुनः ऊर्जा मिलती है।

डॉ. मनदर्शन ने यह भी कहा कि नकारात्मक व तुलनात्मक आत्ममूल्यांकन से बचें और छूटी हुई विषयवस्तु को लेकर अत्यधिक चिंता न करें। ऐसे मित्रों व परिजनों के दबाव से भी दूर रहें जो अनावश्यक अपेक्षाएं बढ़ाते हैं। परीक्षा देने जाते समय स्वयं को उत्सव जैसी सकारात्मक मनोदशा में रखें। इससे स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडॉर्फिन व ऑक्सीटोसिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन्स’ की वृद्धि मस्तिष्क को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।

उन्होंने अंत में कहा कि यदि समस्या लगातार बनी रहे तो मनोपरामर्श अवश्य लेना चाहिए, ताकि समय रहते उचित मार्गदर्शन मिल सके।

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