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संरक्षण और संवर्धन के अभाव में लोककला आल्हा पर विलुप्त होने का खतरा मड़रा रहा  

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@ बिपिन सिंह


पूरा बाजार, अयोध्या । देश के मध्यकालीन योद्धा आल्हा और ऊदल की वीर रस की शैली में शौर्य गाथाओं का गायन कर देश – विदेश में अपने नाम का डंका बजावाने  वाले अपनी ओजस्वी और राष्ट्रवाद से भरपूर प्रस्तुतियों के लिए विख्यात जौनपुर निवासी राष्ट्रीय आल्हा सम्राट फौजदार सिंह आल्हा गायन से राष्ट्र की भावना को जगाने का काम करते आ रहे हैं ,जिससे उनके श्रोताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार होता रहता है ।

आल्हा सम्राट के रुप में पहचाने जाने वाले फौजदार सिंह लोक कला के क्षेत्र में आज के महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं वे ,अपनी  अद्भुत गायन क्षमता से आल्हा जैसी पारंपरिक लोकगीत शैली को जीवंत रखे हुए हैं और लोगों को राष्ट्रप्रेम व शौर्य की भावना से ओत प्रोत कर देते हैं ।

आधुनिकता के इस दौर में भारत की सांस्कृतिक विरासत लोककला आल्हा की मौजूदा स्थिति काफी चिंता जनक है । आज इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास अति आवश्यक है ।

 एक वार्ता के दौरान आल्हा सम्राट फौजदार सिंह ने बताया कि आज आल्हा जैसे समृद्धशाली  गायन विद्या को बचाने के लिए न केवल संरक्षण के पारंपरिक तरीकें अपनाएं जाने चाहिए , बल्कि इसे आधुनिक समय के अनुसार ढालते हुए युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने की आवश्यकता है । श्री सिंह ने कहा कि लोक कला आल्हा को सही सर्मथन और बाजार प्रदान करके ही इसे विलुप्त होने से बचाया जा सकता है । उन्होंने अंत में कहा कि लोककला आल्हा जैसे दुर्लभ विद्या बाजार की व्यावसायिकता के कारण आल्हा की मूल सादगी , स्वाभाविकता और जीवंतता प्रभावित हो रही है ।

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