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मानक के अनुसार चिकित्सक व स्टाफ नहीं, 20 अस्पतालों पर हो चुकी है कार्रवाई

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कार्यालय, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या

◆ आपरेशन करने वाले अस्पतालों में चिकित्सक व स्टाफ को लेकर निर्धारित है मानक


◆ मानक विहीन निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग लगातार चला रहा है अभियान


अयोध्या। मानको को पूरा किए बगैर जिले में कई निजी अस्पतालों का संचालन होना प्रकाश में आया है। जब सीएमओ के नेतृत्व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन अस्पतालों का निरीक्षण किया, तब इसका खुलासा हुआ। मानक विहीन 20 निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर चुका है। मानको में सबसे बड़ी कमी चिकित्सक व स्टार्फ नर्स की तैनाती न होना रहा है। इसके बाद भी इन अस्पतालों में आपरेशन होता रहा है। विशेषज्ञों की मौजूदगी न होना यहां इलाज कराने वाले मरीजों की जान से खिलवाड़ होने की बात कही जा रही है।

नंशा बाजार में आरोग्य चिकित्सालय की ओटी को सील करते स्वास्थ्य विभाग की टीम

                  हेल्थ सेक्टर में लाभ को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक अस्पतालों की भरमार हो गई है। इन अस्पतालों में सबसे ज्यादा मामले सीजेरियन प्रसव को लेकर आते है। 14 मई को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिले में सीजेरियन प्रसव के मामले में काफी कमी आई थी। प्रसव की संख्या बढ़ाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग में समीक्षा शुरु हुई। इसमें सरकारी अस्पतालों से निजी अस्पतालों में प्रसूताओं को आशाओं के माध्यम से ले जाने के प्रकरण सामने आए। 16 मई को सीएमओ के डा. सुशील कुमार बानियान के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिला महिला अस्पताल के सामने स्थित दो अस्पतालों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नवीनीकरण के लिए आवेदन न करने के साथ मानक के अनुसार स्टाफ नहीं पाए गये। प्रसूताओ को आशाओं के माध्यम से इन अस्पतालों में भेजे जाने की शिकायत सीएमओ को मिली थी। जिसके बाद सीएमओ ने सरकारी से निजी अस्पतालों में ले जाने वाली आशाओं को चिन्हित करने का कार्य शुरु किया। 21 मई को निर्धारित सीजेरिन प्रसव के सापेक्ष एक भी न कराए जाने पर सीएमओ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पूरा बाजार के अधीक्षक डा. अमित वर्मा व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बीकापुर के अधीक्षक डा. अवधेश सिंह का मई माह का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया। 22 मई को सीएमओ ने महिला अस्पताल में स्टार्फ नर्स व लैब टेक्निशियन के साथ बैठक में सरकारी अस्पतालों में प्रसव न होने की समीक्षा किया। जिसके बाद प्रसव बढ़ाने व दलालों पर कार्रवाई को लेकर कंट्रोल रुम बनाया गया। मानक विहीन अस्पतालों पर कार्रवाई करने के अभियान को तेज किया गया। जिसमें अब तक 20 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई हो चुकी है। कई निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की जद में आ गये है।


पंजीकरण के समय बताई गयी सुविधाएं उपलब्ध न होने पर होगी कार्रवाई


निरीक्षण के दौरान कई निजी अस्पतालों के मानक विहीन मिलने पर सीएमओ ने अब पंजीकरण के समय बताई गयी सुविधाएं उपलब्ध न होने कार्रवाई करने की बात कही है। सीएमओ डा. सुशील कुमार बानियान का कहना है कि चिकित्सालयों, पैथालोजी सेंटर व डायग्नोस्टिक सेंटर को पंजीकरण के समय उल्लेख की गई सुविधाओ का होना जरुरी है। आईसीयू व सीसीयू में भर्ती रोगियों की देखभाल के लिए अस्पताल में न्यूनतम एमबीबीएस आर्हता वाले चिकित्सकों की उपलब्धता होनी चाहिए। पंजीकरण के समय बताई गयी सुविधाएं निरीक्षण के दौरान न मिलने पर सम्बंधित अस्पतालों के खिलाफ विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।


तीन आशाओं की सेवाएं हो चुकी है समाप्त


13 जून को सीएमओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुदौली स्थित एक निजी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। यहां पर दो आशाओं के द्वारा दो गर्भवती महिलाओं को सीजेरियन के लिए अस्पताल लेकर आया गया था। लेकिन निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई चिकित्सक व स्टाफ नर्स नहीं मिली। सीएमओ ने दोनो आशाओं की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया। सीएमओ को निरीक्षण के दौरान 17 जून को कुमारगंज स्थित एक निजी अस्पताल में आशा के माध्यम से सीजेरियन प्रसव के लिए महिलाओं को लाने की बात सामने आई थी। मौके पर पांच महिला प्रसव के लिए भर्ती मिली थी। जिसके बाद सीएमओ ने सम्बंधित आशा की सेवाओं को समाप्त करने का आदेश जारी किया।

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