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चक्रवाती तूफान का पूर्वांचल में दिख सकता है असर, किसानों को फसल सुरक्षा की सलाह

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ayodhya samachar

◆ 29-30 अक्टूबर को बारिश और तेज हवाओं की आशंका, धान की कटी फसल सुरक्षित रखने की अपील


अयोध्या। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए अयोध्या मंडल समेत पूर्वांचल के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम में संभावित बदलाव से धान सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कटाई, बुवाई और फसलों की सुरक्षा के संबंध में जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज की मौसम वेधशाला से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मौ चक्रवाती तूफान के दौरान हवा की गति 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। तूफान के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 29 और 30 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। अयोध्या मंडल में 45 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।


कटी धान की फसल को खुले में न छोड़ें


कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम अनुकूल रहने पर ही पक चुके धान की कटाई करें। कटाई के बाद फसल को खुले में छोड़ने के बजाय तिरपाल से ढककर सुरक्षित स्थान पर रखें। खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें, ताकि बारिश से फसलों को नुकसान कम से कम हो। वैज्ञानिकों के अनुसार, मटर, मसूर और चने की बुवाई खेतों से अतिरिक्त पानी निकलने के बाद ही करें। सरसों और अलसी की बुवाई से पहले भी खेतों की नमी और मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है। सब्जियों, आलू की फसल और नर्सरी में पानी जमा न होने दें। बारिश की संभावना को देखते हुए सिंचाई, उर्वरकों के प्रयोग और कीटनाशकों के छिड़काव को फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।


भूसा और पशुओं के चारे को भी रखें सुरक्षित


किसानों को भूसे तथा अन्य कृषि उत्पादों को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने के लिए कहा गया है। तेज हवा और गरज-चमक के दौरान खेतों में काम करने से बचें। आंधी के समय पेड़ों के नीचे खड़े न हों। पशुओं को भी सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखें तथा उनके चारे को बारिश में भीगने से बचाएं। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि मौसम की परिस्थितियों पर नजर रखते हुए खेती से जुड़े कार्यों की योजना बनाएं। समय रहते सावधानी बरतने से संभावित बारिश और तेज हवाओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

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