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जुनूनी खरीदारी भी बन रही गंभीर मानसिक समस्या, जागरूकता से संभव है बचाव

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अयोध्या। बिना जरूरत और बिना सोचे-समझे की जाने वाली ऑनलाइन खरीदारी अब केवल आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक समस्या का रूप लेती जा रही है। इसे चिकित्सकीय भाषा में कंपल्सिव बाइंग डिसऑर्डर या आवेशी खरीदारी मनोविकार कहा जाता है। इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति जरूरत न होने पर भी बार-बार खरीदारी करता है और अपने खर्च पर नियंत्रण नहीं रख पाता।

पैका लिमिटेड सभागार में आयोजित सामयिक मनोविकार जागरूकता कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनो-परामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि इस तरह की खरीदारी सामान्य शौक से अलग होती है। खरीदारी के समय व्यक्ति को कुछ देर के लिए खुशी मिलती है, लेकिन बाद में उसे अपराधबोध, शर्म और उदासी महसूस होती है। इसका सीधा असर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।

उन्होंने बताया कि इस समस्या के पीछे अवसाद, चिंता, अकेलापन, कम आत्मविश्वास और तनाव जैसे मानसिक कारण होते हैं। कई लोग मानसिक दबाव से राहत पाने के लिए खरीदारी का सहारा लेते हैं। सोशल मीडिया और आकर्षक विज्ञापन इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। कई मामलों में लोग अपनी इस आदत को परिवार और दोस्तों से छुपाने लगते हैं और खर्चों को लेकर झूठ भी बोलते हैं।

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि यह समस्या जुए की लत जैसे अन्य आवेग नियंत्रण विकारों से मिलती-जुलती है और इसे व्यसन की श्रेणी में रखा जाता है। इसके उपचार के लिए संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार (काउंसलिंग) और जरूरत पड़ने पर दवाएं काफी प्रभावी होती हैं।

उन्होंने सलाह दी कि लोग अपने खर्चों पर नजर रखें, बजट बनाएं, अनावश्यक ऑनलाइन खरीदारी से बचें और नकद भुगतान की आदत डालें। समय पर जागरूकता और सही इलाज से इस समस्या से पूरी तरह निजात पाई जा सकती है।

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