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नगर निगम में 200 करोड़ के घोटाले का दावा, पूर्व मंत्री ने साझा किया आडिट रिपोर्ट 

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◆ प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी भ्रष्टाचार का गम्भीर आरोप, केन्द्रीय एजेन्सी कैग से मामले का जांच कराने की मांग


◆ आडिट रिपोर्ट में चार हजार तीन सौ पांच आपत्तियां, इसमें केवल 102 आपत्तियों का नगर निगम ने दिया है जवाब


अयोध्या। नगर निगम की स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के माध्यम से हुई आडिट में 200 करोड़ का घोटाला होने का दावा पूर्व मंत्री तेजनारायन पाण्डेय ने प्रेसवार्ता के दौरान किया है। उन्होंने पत्रकारों के सामने आडिट की रिपोर्ट भी साझा की। रिपोर्ट में दर्शाए गये तथ्यों को लेकर पूर्व मंत्री ने इसकी जांच केन्द्रीय सरकारी एजेन्सी कैग से कराने की मांग किया है। पूर्व मंत्री का कहना है कि हर हफ्ते मुख्यमंत्री यहां आते है। इसके बाद भी धन की बंटरबांट की गई है। प्रधानमंत्री से आने से पहले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल भेजा जाय।

अपने हाथ में लेकर आडिट रिपोर्ट को पढ़ते हुए पूर्व मंत्री ने बताया कि आडिट रिपोर्ट में चार हजार तीन सौ पांच आपत्तियां है जिनमें 102 आपत्तियों का जवाब इन्होंने दिया है। बाकी लूट किया है। आडिट विभाग लगातार फाइल मांग रहा है। लेकिन नगर निगम नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के अवसर भाजपा के नेताओ व गठजोड़ ने 200 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है। उन्होंने बताया कि पेज नम्बर तीन पर लिखा है अग्रिम धनराशि का समायोजन न कराए जाने के कारण दो करोड़ की क्षति हुई है।



उन्होंने बताया कि पेज नम्बर पांच में विज्ञापन अनुज्ञया शुल्क न जमा करने के कारण करीब डेढ़ करोड़ की आर्थिक क्षति व सफाई कर्मचारियों को आरक्षित रखने जाने से 33 लाख का दुरुपयोग हुआ है। कहीं कोई कर्मचारी नहीं है, लेकिन पूरा भुगतान हुआ है। नगर निगम में पम्प का रखरखाव में अनियमितत्ता। सफाई कमी आरक्षित थे, नगर निगम में उसके अलावा अतिरिक्त सफाई कमियों की व्यवस्था की गई। इसमें भ्रष्टाचार हुआ। जब सफाई कर्मी नहीं है तो भुगतान किसने लिया, भुगतान संस्था को दिया गया। बकाया ठेका की धनराशि नहीं कराई गई। इससे दो करोड़ का नुकसान नगर निगम को हुआ।

 उन्होंने बताया कि अधिक लम्बाई में कार्य दिखाए जाने में 96 लाख का भुगतान, 28 किलोमीटर में 15 किमी काम हुआ, भुगतान लिया गया 28 किमी का। दूरियों को बढ़ाकर भ्रष्टाचार किया गया। अनुबंध के विपरीत कार्य सत्यापन कराकर 41 लाख का भुगतान ले लिया गया। बिना कार्यादेश के एक करोड़ 31 लाख के बिल का भुगतान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 22 जगह पर लाइट लगनी थी, लगी 19 जगह। एक-एक मिनट पर ट्रक तौला गया। एक ही वाहन को धर्मकांटे पर खड़ा करके अलग-अलग नम्बर से तौल की पर्चियां बनायी गई। जो आठ लाख के अनियमित्त भुगतान को दर्शाता है। कान्हा गौशाला में मण्डलायुक्त ने जिस फर्म को काली सूची में डाल दिया, उस फर्म का करीब छह करोड़ से ज्यादा का भुगतान हुआ। बिना कार्य सत्यापन के लाखों रुपये का भुगतान किया गया। विद्युत वितरण खंड को न देकर दूसरे से काम कराया, जिसमें 48 लाख की अनियमित्ता पाई गयी। ठेका शर्तो के अनुसार धनराशि जमा नहीं कराई। बिना टेंडर के काम आवंटित किया गया। एक प्रकृति के कार्य को टुकड़ो में बांटकर काम कराया गया।

उन्होंने बताया कि सड़क बनाने, कान्हा गोशाला समेत कई कार्यो में नगर निगम के द्वारा करोड़ो की लूट की गई है। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी भ्रष्टाचार किया गया। नगर निगम के आडिट के दौरान इसका खुलासा हुआ है। इसमें नियम विपरीत भुगतान करने की बात कही गई है। मण्डलायुक्त ने जिन फार्मो को काली सूची में डाला गया था, उन्हें भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली कई योजनाओं में भ्रष्टाचार हुआ है। केन्द्र की एजेन्सी कैग से इसकी जांच होनी चाहिए। राम के नाम राजनीति होती है। दो सौ करोड़ से उपर का भ्रष्टाचार है। आरोपियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

डॉ. नागेंद्र नाथ अपर नगर आयुक्त अयोध्या ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी विभागों में आडिट एक सामान्य प्रक्रिया है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2023- 2024 की आडिट आपत्तियाँ नगर निगम को प्राप्त हुई हैं, जिनका परीक्षण कराते हुए सक्षम स्तर से उनका उत्तर तैयार कर आडिट विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि तकनीकी रूप से आडिट आपत्तियां अधिकांशत: पत्रावलियों का सम्यक परीक्षण किए बिना प्रेषित की गई लगती हैं।
आपत्तियां निस्तारण हेतु तीन माह समय दिया गया है। निर्धारित समय सीमा में आपत्तियों का जवाब आडिट विभाग को प्रेषित कर निस्तारण करा लिया जाएगा।

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