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नंगे पांव, सिर पर छाता और होंठों पर जय श्रीराम—42 किलोमीटर परिक्रमा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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◆ बारिश में भी नहीं थमी आस्था की डोर, परिक्रमा पथ पर बह रही है आस्था अविरल धारा


अयोध्या। मूसलाधार बारिश, कीचड़ और ठंडी हवा… पर भक्तों की आस्था इन सबसे ऊपर। कार्तिक मास की चौदह कोसी परिक्रमा  के दौरान रामनगरी अयोध्या गुरुवार को भक्ति के सागर में डूबी रही। सरयू स्नान के बाद श्रद्धालु नंगे पांव 42 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पर निकले। बारिश से भीगे मार्ग पर कहीं जलभराव था, कहीं फिसलन, फिर भी श्रद्धालु “जय श्रीराम” का उद्घोष करते आगे बढ़ते रहे।


आस्था का सैलाब, मौसम बेअसर


सुबह से ही रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच श्रद्धालु पॉलीथिन, बोरी या तिरपाल ओढ़कर परिक्रमा कर रहे थे। महिलाएं, वृद्ध और बच्चे भी उत्साह से कदम बढ़ा रहे थे। कई श्रद्धालु मिट्टी की एक मुट्ठी माथे से लगाकर आशीर्वाद लेते देखे गए। श्रद्धालु सीताराम तिवारी ने कहा— “भक्ति के आगे बारिश क्या मायने रखती है। प्रभु का नाम ही सबसे बड़ी ऊर्जा है।”



सुरक्षा व्यवस्था अभेद


श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। 2000 से अधिक पुलिसकर्मी, 13 एएसपी, 36 सीओ और 19 थाना प्रभारी पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी पर हैं। भीड़ पर निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं बम डिस्पोजल स्क्वायड और डॉग स्क्वायड की टीमें भी सक्रिय हैं। संवेदनशील स्थलों पर पीएसी और आरएएफ की कंपनियां तैनात हैं।


सेवा भाव ने जीता श्रद्धालुओं का दिल


परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं ने सेवा शिविर लगाए हैं। देवकाली भीखापुर में श्री रामाय सेवा ट्रस्ट द्वारा लगाया गया सेवा कैंप श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत बना। यहाँ चाय, भंडारा, विश्राम व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष और पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा— “सेवा में ही भगवान के दर्शन हैं। परिक्रमार्थियों की सुविधा हमारी प्राथमिकता है।”


भक्ति, बारिश और भीड़ का अद्भुत संगम


राम की पैड़ी, कनक भवन, हनुमानगढ़ी और गुप्तार घाट क्षेत्र श्रद्धालुओं से पटे रहे। नगर निगम के कर्मचारी सफाई व पानी निकासी में जुटे रहे। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भक्त भक्ति भाव से सराबोर होकर आगे बढ़ते रहे। भारी वर्षा में भी अयोध्या की गलियाँ जय श्री राम के जयघोष से गूंज रहीं थी। आस्था अविरल धारा एक बार फिर सिद्ध कर गई — भक्ति की राह में कोई बाधा टिक नहीं सकती। चौदह कोसी परिक्रमा  31 अक्टूबर तड़के 4:40 बजे तक चलेगी।  पंचकोसी परिक्रमा देव उठनी एकादशी तिथि पर 1 नवंबर तड़के 4 बजे से शुरू होगी, जो 2 नवंबर रात 2:57 बजे तक चलेगी।

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