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गेमिंग और रीलिंग की लत है मानसिक विकार की निशानी, जागरूकता से संभव है इलाज

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अयोध्या। मोबाइल गेमिंग और रील बनाने की दीवानगी अब सिर्फ शौक नहीं रह गई, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले रही है। इसे इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर (आवेगनियंत्रण विकार) कहा जाता है। इस बीमारी में व्यक्ति नुकसान जानने के बाद भी अपने शौक या लत पर काबू नहीं रख पाता। भारत सरकार द्वारा रीयल-मनी ऑनलाइन- गेमिंग व बेटिंग प्लेटफार्म को बंद कर दिया गया है क्योंकि इसके दुष्परिणाम विस्फोटक हो चुके हैं।

महाराजा पब्लिक स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यशाला में जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग, जुआ, लगातार रील बनाना-देखना, जरूरत से ज्यादा खरीदारी करना, अश्लील चैटिंग या पोर्न की लत, यहां तक कि गुस्सा काबू में न रखना—ये सब इसी विकार के लक्षण हैं। यह बीमारी आगे चलकर अवसाद (डिप्रेशन), एंग्जायटी, नशे की लत और अन्य गंभीर मानसिक बीमारियों का कारण बन सकती है।

डॉ. आलोक ने कहा कि इस विकार में दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम और हार्मोन डोपामिन की गड़बड़ी वजह बनती है। शुरुआत में यह मज़ा और रोमांच देता है, लेकिन धीरे-धीरे यह जानलेवा भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज आत्महत्या या हिंसक कदम तक उठा सकता है।

उन्होंने बताया कि अक्सर व्यक्ति और उसके परिजन इस बात को समझ ही नहीं पाते कि यह मानसिक रोग है। परिवार और समाज भी ऐसे मरीज को रोगी मानने के बजाय ताने और डांट-फटकार देते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।

डॉ. आलोक ने कहा कि जागरूकता, परिवार का सहयोग और समय पर मनोचिकित्सक से उपचार इस बीमारी से बाहर निकाल सकते हैं। कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. अजीत द्विवेदी ने की, संयोजन अमित शर्मा और संचालन रीना मिश्रा ने किया।

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