अयोध्या। स्वस्थ व्यवहार के नियमित अभ्यास से व्यक्ति के मस्तिष्क में सकारात्मक बदलाव संभव हैं। कुछ ही सप्ताह के जागरूक प्रयास से दिमाग में नए व्यवहार की प्रोग्रामिंग हो जाती है, जिसे न्यूरोसाइंस में न्यूरोप्लास्टिसिटी या ब्रेन रिवायरिंग कहा जाता है। यह बात मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आलोक मनदर्शन ने पैका स्किल्स सभागार में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य व्याख्यान सत्र में कही।
उन्होंने बताया कि न्यूरोप्लास्टिसिटी का उपयोग संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (कॉग्निटिव बिहैवियर थेरेपी) में किया जाता है, जिसके माध्यम से नकारात्मक सोच और अस्वस्थ मनोवृत्तियों को सकारात्मक व्यवहार से प्रतिस्थापित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सेरोटोनिन जैसे रसायन मानसिक दृढ़ता विकसित करने और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि सेरोटोनिन की कमी से तनाव, चिंता, अवसाद, क्रोध, नशे की प्रवृत्ति, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी), व्यवहार संबंधी विकार तथा पारिवारिक संघर्ष जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। अच्छी नींद से मस्तिष्क पुनः ऊर्जावान होता है और तनाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन आत्मविश्वास बढ़ाने, तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। इनसे व्यक्ति की मनोशक्ति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
कार्यक्रम का आयोजन संकर्षण शुक्ला एवं सरिता उपाध्याय के संयोजन में किया गया। सत्र का संचालन दीपक पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।