अयोध्या। बाल यातना के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस (4 जून) की पूर्व संध्या पर मनोचिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले अधिकांश यौन शोषण के मामले परिचितों, करीबियों और रिश्तेदारों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि बच्चों से स्नेह और दुलार करना सामान्य और स्वस्थ व्यवहार है, लेकिन कुछ लोग प्यार-दुलार की आड़ में बच्चों का यौन शोषण करते हैं। इस प्रकार की विकृत मानसिकता को पीडोफिलिया कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि यौन शोषण का शिकार होने वाले बच्चे गहरे मानसिक आघात से गुजरते हैं। ऐसी घटनाओं के बाद बच्चों में डर, चीखना-चिल्लाना, घर से बाहर निकलने में झिझक, स्कूल और पढ़ाई से दूरी बनाना तथा अन्य असामान्य व्यवहार देखने को मिल सकते हैं। कई मामलों में आगे चलकर अवसाद, भय और व्यक्तित्व संबंधी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।
डॉ. मनदर्शन ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे पीड़ित बच्चे के सामने घटना को बार-बार न दोहराएं और उसे उन परिस्थितियों से दूर रखें, जिनसे घटना की यादें ताजा हों। उन्होंने कहा कि बच्चों को मनोरंजक गतिविधियों में शामिल करना और आवश्यक मनोवैज्ञानिक परामर्श दिलाना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। उन्होंने कहा कि घर और स्कूल दोनों जगह बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में नियमित रूप से जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही स्कूलों में काउंसलिंग और संवाद के माध्यम से बच्चों को किसी भी प्रकार के यौन शोषण की पहचान करने तथा जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।