◆ अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर परिवारिक संबंधों की अहमियत पर हुई चर्चा
अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर आयोजित वार्ता में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक होता है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए परिवारिक प्रेम, आत्मीयता और भावनात्मक सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार ही व्यक्ति के मन का वास्तविक “मेंटल-फूड” है।
डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि परिवारिक रिश्तों में प्रेम, संवाद और अपनापन मनोस्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक मनोचिकित्सा के प्रमुख स्तंभ एल्बर्ट एलिस के अनुसार “प्यार देना और प्यार पाना” मन के लिए आवश्यक पोषक तत्व है, जिसका स्थायी आधार परिवारिक एकजुटता होती है।
उन्होंने कहा कि परिवारिक संबंधों में आत्मीयता बढ़ने से शरीर में ऑक्सीटोसिन, डोपामिन, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” सक्रिय होते हैं, जो खुशी, उत्साह, आत्मबल और तनाव मुक्ति में सहायक होते हैं। स्वजनों के साथ वार्तालाप, सहभोज, हंसी-मजाक और विचार-विमर्श मानसिक तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलते सामाजिक और परिवारिक संबंधों के बीच स्थायी परिवारिक जुड़ाव मानसिक संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अवसाद और आत्महत्या जैसी बढ़ती समस्याओं के समय रहते उपचार में परिवार के भावनात्मक सहयोग को सबसे महत्वपूर्ण बताया और इसे “फैमिली थेरैपी” की संज्ञा दी।
उन्होंने कहा कि पशु-प्रेम, मानव सेवा, कला, साहित्य, संगीत, भक्ति और अध्यात्म भी सकारात्मक भावनाओं के विस्तार हैं, जो भारतीय संस्कृति की “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को मजबूत करते हैं।