◆ कहा कि रोपे गये पौधों में से 75 प्रतिशत पौधे हैं जीवित
अयोध्या। पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। इस दौरान 204 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जिनमें से 75 प्रतिशत पौधे जीवित हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 5 लाख एकड़ क्षेत्र में वनाच्छादन बढ़ा है। ये बाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक पेड़ मा के नाम अभियान के तहत पौधरोपण अभियान के आयोजित जनसभा में कही। सीएम योगी बुधवार को रामपुर हलवारा में सरयू नदी के किनारे त्रिवेणी वाटिका में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बरगद, नीम और पीपल के पौधे रोपकर इसे भगवान श्रीराम, धरती माता और जन्मदायिनी माता को समर्पित किया। आयोजित जनसभा में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ इस अभियान की महत्ता पर जोर दिया।
सीएम योगी ने कहा कि हमने हीटवेव को ग्रीनवेव में बदला है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहायक है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़ों में भी जीवन है और ये छाया, फल, मृदा संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का बताया महत्व

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सीएम योगी ने धरती माता और जन्मदायिनी मां के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। उन्होंने वैदिक उद्घोष ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक सच्चा पुत्र वही है जो अपनी मां की सेवा और रक्षा करता है। इस अभियान के तहत प्रदेशवासियों ने सुबह 7 बजे से ही उत्साह के साथ पौधरोपण शुरू किया। योगी ने कहा कि यह अभियान वर्तमान को संवारने और भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। पेड़ हमें प्रदूषण, सांस की बीमारियों और कार्बन उत्सर्जन के दुष्प्रभावों से बचाएंगे।
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि अतिवृष्टि, अनावृष्टि और बादल फटने जैसी घटनाएं अनियोजित विकास का परिणाम हैं। उन्होंने अमेरिका के टेक्सास में हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र किया, जहां अचानक आई बाढ़ में सैकड़ों बच्चे लापता हो गए। सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि नियोजित और वैज्ञानिक प्रयासों से विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आठ साल पहले शुरू हुए इस अभियान में शुरुआत में केवल 5 करोड़ पौधे उपलब्ध थे, लेकिन वन विभाग, मनरेगा और निजी क्षेत्र के सहयोग से आज 52 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं।
