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विघ्नेश्वरनाथ महादेव धाम शिवाला मंदिर: 500 वर्ष पुराना तंत्राधारित शिव धाम, महाशिवरात्रि पर 61 फीट त्रिशूल बना आकर्षण केंद्र

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अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के रमपुरवा गांव में तमसा नदी के तट पर स्थित विघ्नेश्वरनाथ महादेव धाम शिवाला मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड में स्नान करने मात्र से विकारों से मुक्ति मिलती है, वहीं शिवलिंग पर अर्पित जल के ग्रहण से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां मंत्र सिद्धि और साधना के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि से पूर्व शिव बारात और विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।


नागर शैली का अद्भुत तंत्र आधारित शिव मंदिर



इस मंदिर का निर्माण लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व वर्ष 1734 ईस्वी में राजा दर्शन सिंह द्वारा कराया गया था। नागर शैली में निर्मित यह अष्ट मंडपम एवं चौसठ योगिनियों वाला तंत्र आधारित शिव मंदिर अपनी भव्यता और रहस्यमयी संरचना के लिए विशेष पहचान रखता है।

मंदिर के भीतर लगभग 300 फुट लंबी सुरंग और दस फुट लंबा व चौड़ा ध्यान कक्ष स्थापित है। गर्भगृह करीब 25 फुट नीचे स्थित है, जहां सूर्योदय की पहली किरण और सूर्यास्त की अंतिम किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। यहां स्थापित शिवलिंग लगभग 4.5×4 फुट आकार का है। मुख्य पुजारी अमित योगी के अनुसार शिवलिंग पर स्वयमेव त्रिपुंड और जटाओं का आकार उभर रहा है, जिसे लोग चमत्कार मान रहे हैं। मंदिर के सामने कुंड में 128 तीर्थों का जल समाहित होने की मान्यता भी इसे विशेष बनाती है।


शाहगंज स्टेट से जुड़ी है ऐतिहासिक सुरंग



मंदिर के प्रमुख पुजारी अमित योगी के अनुसार मंदिर के दक्षिण करीब दो किलोमीटर दूर राजा दर्शन सिंह ने शाहगंज स्टेट का निर्माण कराया था, जहां अपने पुत्र मानसिंह की ताजपोशी की गई थी। स्टेट से मंदिर तक दो किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई थी, जिसमें अब लगभग 300 फुट हिस्सा ही शेष बचा है और उसी मार्ग से गर्भगृह तक पहुंचा जा सकता है। वर्ष 2015 में मंदिर का जीर्णोद्धार सर्व समाज के सहयोग से कराया गया। वर्ष 2010 में चोरी हुआ कलश 2016 में पुनः स्थापित किया गया।


800 किलो वजनी 61 फिट ऊंचा त्रिशूल पहुंचा विघ्नेश्वर धाम


मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले के विशेष कारीगरों द्वारा तैयार 61 फुट लंबा, 11 फुट चौड़ा और करीब 800 किलो वजनी विशाल त्रिशूल रमपुरवा पहुंच चुका है जिसे देखने के लिए रोज लोग पहुंच रहे है। महाशिवरात्रि के बाद विधि विधान के साथ त्रिशूल की स्थापना की जाएगी।

त्रिशूल के साथ निकली सनातन एकता यात्रा दो फरवरी को छिंदवाड़ा से प्रारंभ होकर बीते मंगलवार को बारुन बाजार स्थित हनुमान मंदिर, बारुन बाजार पहुंची ही जहां लोगों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया था। इस दौरान ‘ॐ जय शिव ओंकारा’, ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘हर-हर बम-बम’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। वैसे तो हर वर्ष करीब बीस हजार भक्त महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करते थे लेकिन आज की महाशिवरात्रि पर त्रिशूल को देखने को देखने को लेकर भक्तों की और बढ़ सकती है। मन्दिर के पुजारी अमित योगी ने बताया कि 12 ज्योतिर्लिंगों में अब तक इतना ऊंचा और विशाल त्रिशूल स्थापित नहीं किया गया है, यह भारत का पहला ऐसा त्रिशूल होगा जो विघ्नेश्वर धाम रमपुरवा में स्थापित किया जाएगा।


सामाजिक समरसता की अनूठी पहल


सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंदू समाज के सभी वर्गों से 365 पुजारियों की नियुक्ति की गई है। जो प्रतिदिन अलग-अलग परिवार पूजा-अर्चना में सहभागी बनते हैं, जिससे समाज में एकता और सद्भाव का संदेश प्रसारित हो रहा है।

भव्यता, ऐतिहासिकता और चमत्कारी मान्यताओं से जुड़ा यह धाम आज न केवल अयोध्या, बल्कि आसपास के जिलों में भी श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। महाशिवरात्रि पर हजारों भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे।

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