✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
लगभग 5,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित अन्नपूर्णा पर्वत के शिखर पर विराजमान मां पूर्णागिरि के दर्शन का उत्साह मन में था, लेकिन जैसे ही हमने पैदल यात्रा शुरू की, यह स्पष्ट हो गया कि यह मार्ग बिल्कुल आसान नहीं है। शुरुआत में लगा कि कुछ दूर चलने के बाद रास्ता समतल हो जाएगा और आगे की यात्रा सहज हो जाएगी, किंतु यह भ्रम शीघ्र ही टूट गया। सामने दूर तक केवल सीढ़ियां ही सीढ़ियां दिखाई दे रही थीं और हर अगला कदम पिछले कदम से अधिक कठिन प्रतीत हो रहा था।
