✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
दुधवा की मनमोहक स्मृतियों को मन में संजोए हुए सुबह लगभग 10 बजे हम दोनों मित्र पलिया स्थित स्लीप इन होटल से अपनी अगली मंजिल के लिए रवाना हुए। वाहन जैसे-जैसे दुधवा के कम सघन क्षेत्र से होते हुए आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे चारों ओर फैली हरियाली यात्रा को और भी आनंदमय बनाती गई। आगे बढ़ते समय शाहजहांपुर जनपद का हिस्सा पार करने के बाद हम पीलीभीत की सीमा में प्रवेश कर गए। इस भी एक जगह सड़क के किनारे खेतों से ताजा तोड़े गए खीरे खरीदें और उसकी ताजगी का स्वाद लिया। रास्ते में शारदा नहर का कलकल करता निर्मल प्रवाह दूर तक हमारा साथी बना रहा। लालकुआँ ब्रिज के समीप रुककर हमने बहते जल की मधुर ध्वनि का आनंद लिया, कुछ तस्वीरें खिंचवाईं और उस पल को अपनी स्मृतियों में कैद कर लिया।
पुराने मित्र की आत्मीयता
पीलीभीत पहुँचते ही मुझे अपने पुराने परिचित मनीष सिंह जी की याद आई। फोन मिलाया तो उन्होंने तुरंत बात की। उन्होंने बताया कि वे आवश्यक कार्य से नैनीताल गए हुए हैं, लेकिन यह जानकर कि मैं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हूँ, उन्होंने अपने कार्यालय पहुंचने पर ठहरने और भ्रमण की पूरी व्यवस्था कराने का प्रस्ताव रखा। उनकी सहजता और आत्मीयता ने मन को छू लिया।
चूँकि दुधवा के जंगलों का विस्तृत भ्रमण हम पहले ही कर चुके थे, इसलिए इस बार पीलीभीत में बाघ देखने की उत्सुकता को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा। हमने निश्चय किया कि अगली बार केवल पीलीभीत टाइगर रिजर्व को समर्पित यात्रा करेंगे। इसके बाद हम दूरभाष पर मनीष जी को प्रणाम कर आगे बढ़ चले।
शारदा नहर के साथ-साथ
शारदा नहर के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हुए कई स्थानों पर निर्माण कार्य और वैकल्पिक मार्गों के कारण रास्ता बदलना पड़ा। इस तरह हम लगभग एक घंटे बाद उत्तराखंड राज्य के उधमसिंह नगर जनपद में प्रवेश कर गए। मैदानी भूभाग धीरे-धीरे पहाड़ी परिवेश में बदलने लगा और मौसम में भी सुखद परिवर्तन महसूस होने लगा।
चाय की प्याली और पहाड़ों की आहट
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र की नगर पंचायत खटीमा में हमने थोड़ी देर विश्राम किया। चाय की चुस्कियों के साथ स्थानीय लोगों से बातचीत की और पहाड़ी संस्कृति की सहजता का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद हमारा सफर टनकपुर की ओर बढ़ चला।
टनकपुर में छोटा विश्राम
