◆ गले में रामयंत्र टांगकर दोनों हाथों से बजाते हैं विक्रेता, भजनों की धुन पर आकर्षित हो रहे श्रद्धालु
◆ 50 रुपये में बिक रहा एक जोड़ा, दीपोत्सव में दोगुनी से अधिक हो रही कमाई
◆ राम मंदिर निर्माण के बाद बढ़े पर्यटकों के आगमन से छोटे कारोबारियों को मिला रोजगार का नया अवसर
अयोध्या। सरयू के घाटों पर दीपोत्सव की रौनक के बीच रामयंत्र की मधुर धुन श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गले में रामयंत्र टांगकर दोनों हाथों से इसकी ताल मिलाते विक्रेता रामभक्ति के गीतों से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। घाटों से गुजरते श्रद्धालु धुन सुनकर ठहर जाते हैं। कोई कुछ देर रुककर रामभक्ति के गीतों का आनंद लेता है तो कोई रामयंत्र को स्मृति के रूप में खरीदकर अपने साथ ले जाता है। 50 रुपये में एक जोड़ा बेचने वाले इन छोटे कारोबारियों के लिए रामनगरी की बढ़ती रौनक आजीविका का सहारा बन रही है।
गोरखपुर के सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वह बताते हैं कि आम दिनों में प्रतिदिन 800 से 1000 रुपये तक की कमाई हो जाती है, लेकिन दीपोत्सव के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच रहा है। रामयंत्र बेचने के साथ वह रामभक्ति के गीत भी गाते हैं। उनकी धुन सुनकर श्रद्धालु रुकते हैं और खरीदारी करते हैं। उनके लिए यह काम केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़ने का माध्यम भी है।
बिहार के राजेंद्र महतुर भी पिछले तीन वर्षों से इसी कारोबार में लगे हैं। पहले वह दूसरे काम करते थे, लेकिन अब रामयंत्र बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके मुताबिक सामान्य दिनों में करीब 800 रुपये प्रतिदिन की आमदनी होती है, जबकि दीपोत्सव में यह बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंच जाती है। वह बताते हैं कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। रामयंत्र की धुन सुनकर लोग रुकते हैं और इसे खरीदते हैं। इससे रोजगार के साथ रामभक्ति से जुड़े रहने का अवसर भी मिलता है।
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में धार्मिक पर्यटन का विस्तार स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारियों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। दीपोत्सव जैसे आयोजनों में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ का असर घाटों पर लगने वाली छोटी दुकानों और अस्थायी कारोबार पर भी दिखाई देता है। रामयंत्र बेचने वाले इन लोगों की कमाई सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।
सरयू के घाटों पर रामयंत्र की गूंज आस्था और आजीविका के मेल की एक अलग तस्वीर पेश कर रही है। श्रद्धालु यहां से रामभक्ति की एक निशानी लेकर लौट रहे हैं तो दूसरी ओर इसकी धुन से जुड़े छोटे कारोबारी अपने परिवार की खुशियों के लिए कमाई का अवसर तलाश रहे हैं।