जलालपुर अंबेडकर नगर। गांव के गन्ने और धान के खेत अब सिर्फ फसल की खुशबू नहीं बिखेरते, वहां दर्द की तीखी गंध है। शनिवार की सुबह किताबों के साथ स्कूल निकली 17 वर्षीय छात्रा शाम होते-होते लाश बनकर लौटी। फटी शर्ट, अस्त-व्यस्त कपड़े और आंखों में अधूरी इच्छाओं का सूनापन। खेतों की मिट्टी पर लिखी यह कहानी सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज से किया गया सवाल है। हम अपनी बेटियों को आखिर कब तक सुरक्षित रख पाएंगे?
न्याय की डगर पर परिवार
