Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या श्रद्धा, साहित्य और राष्ट्रभाव की त्रिवेणी में सराबोर नजर आया कवि सम्मेलन

श्रद्धा, साहित्य और राष्ट्रभाव की त्रिवेणी में सराबोर नजर आया कवि सम्मेलन

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◆ अटल जयंती पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्यपाठ ने कवि सम्मेलन के वातावरण को कर दिया राममय


◆ मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास ने किया कवि सम्मेलन का उद्घाटन


◆ श्री अयोध्या न्यास व पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने किया था कवि सम्मेलन का आयोजन


अयोध्या। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रांगण में अटल जयंती के अवसर पर गुरुवार को श्री अयोध्या न्यास व पूर्व सांसद लल्लू सिंह द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन श्रद्धा, साहित्य और राष्ट्रभाव की त्रिवेणी में सराबोर नजर आया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं, आदर्शों और जीवन-मूल्यों पर आधारित काव्य-पाठ ने पूरे वातावरण को राममय कर दिया। कवियों ने अपनी सशक्त लेखनी और ओजस्वी वाणी के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वीर, हास्य और शृंगार रस के सुगठित समन्वय ने कवि सम्मेलन को साहित्यिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

कवि डॉ. सुनील योगी ने “जो राम का नहीं, किसी काम का नहीं” जैसी ओजपूर्ण पंक्तियों से श्रोताओं में राष्ट्र और धर्म के प्रति चेतना जागृत की, वहीं विनीत चौहान ने “भगवान राम के मंदिर की चर्चा है चांद-सितारों में” की काव्य-प्रस्तुति से राममंदिर की वैश्विक गूंज को शब्दों में ढाल दिया। कविताओं के बीच-बीच में “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के उद्घोष से पूरा पंडाल गुंजायमान होता रहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र-सेवा, विचार और संस्कार को समर्पित रहा। उनके आदर्श आज भी हम सभी के लिए पथ-प्रदर्शक हैं और प्रत्येक नागरिक को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।



पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कवि सम्मेलन भारतीय साहित्य, संस्कृति और लोकपरंपराओं के जीवंत संगम होते हैं। देश के प्रख्यात कवियों की रचनाओं के माध्यम से आमजन को साहित्यिक चेतना से जोड़ने का यह सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि अटल जी की प्रेरणादायी कविताएं न केवल राष्ट्रप्रेम जगाती हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती रहती हैं।

                  कवि सम्मेलन में विष्णु सक्सेना ने मेरी आवाज की खुशबू को हवाएं दे दे, प्यास बुझे तो शबनम खरीद सकता हूं, डॉ. सुनील जोगी ने भारत से भिड़ेगा वो वतन न रहेगा, जब राम बुलाएंगे तो जाना ही पड़ेगा, विनीत चौहान ने जो कील अवध के सीने में बरसों से पड़ी कसकती थी, पानी कम है मगर रक्त की नदी बहा करती है, इसकी भाव विभोर करने वाली प्रस्तुति दी। डॉ. अनु सपन ने आप जब पास होते है, हारते हारते जीतना आ गया, प्रियांशु गजेन्द्र ने एक अयोध्या है विश्व पे भारी, रात रात भर तुमको गाया, जमुना प्रसाद ने मुसाफिर कई घबराएं बहुत है, हमें अमृत का प्याला दे रहा है, रुचि चतुर्वेदी ने अहिल्या व केवट का जीवन वह तारने आए, प्रेम का नाम बृज हो गया, अनिल चौबे ने हैलो पंडित जी का स्वाद चला गया है, तो प्रेमिका जैसी भी हो भगवान का प्रसाद है जैसी रचनाओं की प्रस्तुति करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिसार गीता शुक्ल ने अंधो का सरदार बदलने वाला है, क्यो काल कहीं पर सोया है, क्यो मौत नहीं आ जाती है, लोकश त्रिपाठी ने हम मानवों के बीच में अवतार है अटल, फिर गीतों में कैसे कह दूं कि मुझको तुमसे प्यार नहीं की प्रस्तुति कवि सम्मेलन में किया।

मौके पर जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरू अनंताचार्य, रामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास, महंत एमबी दास, राज्यमंत्री सतीश शर्मा, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायक चन्द्रभानु पासवान, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, अवधेश पाण्डेय बादल, कमला शंकर पाण्डेय, ओम प्रकाश सिंह, अवधेश श्रीवास्तव, केन्द्रीय मंत्री विहिप राजेन्द्र सिंह पंकज, शरद शर्मा, शैलेन्द्र कोरी, तिलकराम मौर्या, राघवेन्द्र पाण्डेय, अशोक कसौधन, राकेश मणि त्रिपाठी, अखंड प्रताप सिंह डिम्पल, कृष्ण कुमार पाण्डेय खुन्नू, मनमोहन जायसवाल, अजय रस्तोगी, मोहन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहा।

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