Sunday, March 8, 2026
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गीता का ज्ञान तोड़ता है मन की उलझन, श्रीकृष्ण हैं श्रेष्ठ मनोपरामर्शदाता – डा मनदर्शन


अयोध्या। जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मन के उपचार की एक अद्भुत विधि भी है। जीवन के संघर्ष और परिस्थितियों से पैदा होने वाली मानसिक परेशानियों का हल इसमें विस्तार से बताया गया है।


डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

डॉ. आलोक ने बताया कि आधुनिक मनोचिकित्सा में संज्ञान व्यवहारउपचार (कॉग्निटिव बिहैवियर थेरेपी–CBT) सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसमें सबसे पहले उन विचारों और भावनाओं को पहचाना जाता है जो मन पर हावी होकर लोभ, मोह, क्रोध, ईर्ष्या जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों में बदल जाते हैं। ये प्रवृत्तियां आगे चलकर अवसाद, डर, शक या अन्य मानसिक रोग का रूप ले सकती हैं।

यही तरीका हजारों साल पहले श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन के साथ अपनाया था। उन्होंने एक कुशल मनोविश्लेषक और मार्गदर्शक की तरह अर्जुन की दुविधा दूर की और उसके मन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास भर दिया।

डॉ. आलोक ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में सही सोच और आत्मजागरूकता बेहद जरूरी है। अगर मन में सही दृष्टिकोण नहीं होगा, तो गलत आदतों और व्यवहार में बदलाव लाना मुश्किल हो जाएगा। गीता के श्लोक हमें यही सिखाते हैं कि भावनाओं को समझकर और नियंत्रित करके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि गीता की सीख को अपनाकर मानसिक तनाव और चिंता से मुक्ति पाएं।

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