पूराबाजार, अयोध्या। सूर्यवंश क्षत्रिय केवल जाति नहीं है ,बल्कि एक चरित्रवान कर्म है जो अन्याय के सामने झुकता नहीं और कमजोरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है l सूर्यवंश क्षत्रिय समाज आज भी यह संदेश देना चाहता है कि समाज को रक्षा और अनुशासन के लिए क्षत्रिय गुणों की आवश्यकता है ।
यह बात सूर्यवंश क्षत्रिय समाज के सिद्ध पीठ दशरथ समाधि स्थल परिसर में आयोजित एक क्षत्रिय पंचायत को संबोधित करते आयोजन के मुख्य सूत्रधार व सूर्यवंश क्षत्रिय उत्थान समिति अयोध्या के मुखिया बाबू भगवान बक्श सिंह ने बताते हुए कहा कि क्षत्रिय धर्म का अर्थ सिर्फ युद्ध नहीं है बल्कि नैतिक मूल्यों , सामाजिक व्यवस्था और न्याय को बनाए रखने का एक जीवित संकल्प है ।
उत्थान समिति के संरक्षक दादा गुरु प्रसाद सिंह ने बताया कि सनातन धर्म गवाह है कि क्षत्रिय धर्म सर्वोच्च रक्षक है वे राष्ट्र , समाज और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दिया है ।
क्षत्रिय समाज के वरिष्ठ नेता जंग बहादुर सिंह ने बताया कि क्षत्रिय धर्म को इस लिए सर्वोपरि माना गया है ,क्योंकि इसमें क्षत्रिय अपने प्राण और अहंकार को ईश्वर को समर्पित कर , पुरस्कार की चिंता किए बिना कर्म और धर्म के लिए संघर्ष रत रहता है ।
ठाकुर राम बक्श सिंह ने बताया कि सूर्यवंशी एक जाति नहीं बल्कि एक कर्तव्य हैं जिसमें शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान आवश्यक है ताकि निस्वार्थ भाव से लोगों की रक्षा की जा सके |
अंत में धार्मिक अनुष्ठान एवं सूर्यवंश क्षत्रिय महाकुम्भ के संयोजक विधायक अभय सिंह ने बताया कि 14 से 20 मार्च तक राजेपुर आवास पर देश दुनिया के जाने माने भागवत मर्मज्ञ पं० ज्ञान चन्द्र के मुखार बिन्दु से भगवद् कथा की अमृत वर्षा होगी तत्पश्चात 21 मार्च को सर्व समाज का विराट अखण्ड महा भण्डारा होगा जिसमें पास पड़ोस के करीब आधा दर्जन जनपदों से आए श्रद्धालू पूरा बाजार में स्थित आशा भगवान बक्श सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रसाद ग्रहण करेंगे। सभी को आमंत्रण कार्ड पहुॅच चुका है ।
वही क्षत्रिय नेता संतोष सिंह ने बताया कि 22 मार्च को होने जा रहे चोदह कोसीय सूर्यवंश क्षत्रिय महाकुंभ की यादगार तैयारियां बहुत जोरों पर है । केशरिया ध्वज से पटे आशा भगवान बक्श महाविद्यालय में बताया जाता है कि 62 गांव अयोध्या और 60 गांव सरयू उस पार बस्ती यानि कि कुल मिला कर 122 सूर्यवंशी क्षत्रियों के गांव में आमंत्रण के लिए सनातनी पद्धति के अनुरुप “अक्षत ” रुपी पीला चावल हजारों के घर घर बांटा जा चुका है ।