◆ ताले में कैद हैं बच्चों के सपने, स्कूल बंद रखकर कैसी शिक्षा व्यवस्था? : सपा
अयोध्या। शिक्षक दिवस पर समाजवादी पार्टी ने जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अनूठे और आक्रामक अंदाज में मोर्चा खोल दिया। सपा नेताओं और पदाधिकारियों ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में बंद पड़े प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पहुंचकर शिक्षक दिवस मनाया और स्कूलों पर लटके तालों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। तारुन, मिल्कीपुर, मया, सोहावल, मसौधा, अमानीगंज और पूरा बाजार समेत कई क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए सपा ने सवाल उठाया कि जब विद्यालय ही बंद हैं तो गांव के बच्चों के भविष्य का निर्माण कैसे होगा?
सपा जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव ने कहा कि विद्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि गांव के भविष्य को गढ़ने का केंद्र हैं। जिस स्थान पर बच्चों की किलकारियां और पढ़ाई की आवाज सुनाई देनी चाहिए, वहां ताले लटकना सरकार की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर बंद विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कर सपा ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को आईना दिखाने का काम किया है।
मिल्कीपुर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अजीत प्रसाद ने अमानीगंज के बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय विनायकपुर में शिक्षक दिवस मनाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों पर सबसे अधिक भरोसा गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चों का है। जब विद्यालय ही बंद रहेंगे और पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो ग्रामीण बच्चों के भविष्य के साथ न्याय कैसे होगा? सरकार को कागजों और दावों से बाहर निकलकर बंद विद्यालयों को खोलने और वहां पर्याप्त शिक्षकों व मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।
मसौधा विकासखंड के खरगूपुर में हाजी फिरोज खान गब्बर ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल माल्यार्पण और औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह दिन सरकार से यह सवाल पूछने का भी है कि गांवों के बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही है। उन्होंने कहा कि बंद विद्यालय सरकार की शिक्षा नीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन के बीच के अंतर को साफ दिखा रहे हैं।
सोहावल के कटरा मोहम्मदपुर में राघवेंद्र प्रताप सिंह अनूप ने कहा कि शिक्षक देश की नई पीढ़ी का निर्माता है, लेकिन शिक्षक का सम्मान तभी सार्थक होगा जब गांवों में विद्यालय खुले हों और उनमें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक मौजूद हों। उन्होंने कहा कि बंद विद्यालयों के ताले केवल भवनों पर नहीं लगे हैं, बल्कि इन तालों से ग्रामीण बच्चों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
सपा प्रवक्ता लवलेश पांडेय ने बताया कि पार्टी ने जिले के अलग-अलग बंद विद्यालयों में शिक्षक दिवस मनाने की जिम्मेदारी नेताओं और पदाधिकारियों को दी थी। तारुन के बेलाईंया स्थित बंद प्राथमिक विद्यालय में जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव के साथ चौ. लौटन राम निषाद, सियाराम निषाद, रोली यादव, राजेश पटेल और विजय यादव मौजूद रहे।
इसी क्रम में अमानीगंज के विनायकपुर में अजीत प्रसाद, मोहम्मद अली और रिजवान रसूल, मसौधा के खरगूपुर में हाजी फिरोज खान गब्बर, अमृत राजपाल और एजाज अहमद, सोहावल के कटरा मोहम्मदपुर में राघवेंद्र प्रताप सिंह अनूप व छोटे लाल यादव, मया के केशवपुर बेल्हा में रामसागर वर्मा व इंद्रपाल यादव तथा पूरा बाजार के रामपुर हलवारा में रक्षाराम यादव, जय सिंह राणा और राम अचल यादव समेत पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।