जलालपुर, अंबेडकर नगर। समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का पूरा राजनीतिक जीवन सामाजिक न्याय, समानता और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा। उन्होंने किसानों, मजदूरों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज बनकर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी विचारधारा आज भी समाजवादी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। यह बातें मुलायम सिंह यादव के जीवन, संघर्ष और समाजवादी विचारधारा पर आयोजित कार्यक्रम में सपा नेताओं ने कहीं।
वक्ताओं ने कहा कि 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई में जन्मे मुलायम सिंह यादव डॉ. राममनोहर लोहिया के समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वर्ष 1967 में पहली बार विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। अक्टूबर 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना कर उन्होंने समाजवादी विचारधारा को संगठित राजनीतिक मंच दिया। वह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और वर्ष 1996 से 1998 तक देश के रक्षा मंत्री रहे।
विधानसभा अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव ने कहा कि नेताजी ने राजनीति को सत्ता प्राप्त करने का माध्यम बनाने के बजाय गरीबों, किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों को अधिकार दिलाने का जरिया बनाया। उनका जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनने की प्रेरणा देता है।
पूर्व विधायक सुभाष राय ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने गांव, गरीब, किसान और नौजवान को राजनीति के केंद्र में रखा। वहीं, जिला पंचायत सदस्य आलोक सिंह यादव ने कहा कि नेताजी सभी जातियों, धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। सामाजिक सद्भाव और समान अवसर की उनकी सोच आज भी प्रासंगिक है।
कार्यक्रम में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुलायम सिंह यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए उनके बताए समाजवादी रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान डॉ. राजेश सिंह, भीम निषाद, सिद्धार्थ मिश्रा, अनीसुर्रहमान, कमर हयात, नदीम अंसारी, मंजूर अहमद, पुंडरी गौतम, कौशल्या प्रजापति और श्याम सुंदर उर्फ पप्पू वर्मा सहित सपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।