अयोध्या। पत्नी की गला दबाकर हत्या करने और शव छिपाने के मामले में अदालत ने पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में मृतका की नाबालिग बेटियों की गवाही अहम साबित हुई। बेटियों ने अदालत में पिता द्वारा मां की हत्या करने और उसके नशे का आदी होने संबंधी तथ्य बताए थे।
गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में हुई नफीसा बानो की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने शुक्रवार को आरोपी मोहम्मद शाहिद को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी माना। अदालत ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास के साथ 40 हजार रुपये जुर्माना तथा साक्ष्य छिपाने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया गया है।
अभियोजन के अनुसार 22 जुलाई 2024 को शाहिद ने अपनी पत्नी नफीसा बानो की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को सफेद बोरे में भरकर मोपेड से ले जाया गया और उसे कुएं में फेंककर छिपाने का प्रयास किया गया। मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों को पुलिस ने जांच में शामिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका की नाबालिग बेटियों ने अदालत में गवाही दी। उन्होंने मां के साथ मारपीट और पिता के नशे का आदी होने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को कठोर दंड दिए जाने की मांग की।
एडीजीसी ज्ञानेश चंद्र पांडे और रोहित पांडे ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि में से 25 हजार रुपये पीड़ित नाबालिग बेटियों को दिए जाने का भी आदेश दिया गया है।