Saturday, June 6, 2026
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आग की घटना के बाद भी अधूरी सुरक्षा व्यवस्था, अस्पतालों की दीवारों से गायब फायर पाइपें


अयोध्या। जिला महिला अस्पताल में 22 मई को हुई आगजनी की घटना ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। घटना के बाद व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी कई सवाल खड़े कर रही है। आग लगने के 13 दिन बाद जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की बाहरी दीवारों पर लगे फायर हाइड्रेंट बॉक्स खाली पड़े हैं। इनमें आग बुझाने के लिए आवश्यक पाइपें मौजूद नहीं हैं, जिससे आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित हो सकता है।

महिला अस्पताल में आग लगने के दौरान कर्मचारियों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने निकासी मार्गों और आपदा प्रबंधन की समीक्षा शुरू की, लेकिन अग्निशमन तंत्र की बुनियादी कमियां अब भी बरकरार हैं। जिला अस्पताल के जनरल वार्ड की बाहरी दीवारों पर लगे फायर बॉक्स हों या महिला अस्पताल के मुख्य भवन के निकास द्वार के समीप स्थापित बॉक्स, अधिकांश स्थानों पर पाइपें नदारद हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बहुमंजिला भवनों में बाहरी फायर हाइड्रेंट व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई बार आग इतनी तेजी से फैलती है कि भवन के भीतर प्रवेश करना संभव नहीं रह जाता। ऐसी स्थिति में बाहरी पाइप नेटवर्क ही दमकल कर्मियों के लिए पहली और सबसे प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था साबित होता है। इसके बावजूद दोनों प्रमुख सरकारी अस्पतालों में यह व्यवस्था अधूरी दिखाई दे रही है।

जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। नए फायर एक्सटिंग्विशर खरीदे जा रहे हैं तथा फायर वाटर सिस्टम की कार्यक्षमता का परीक्षण भी कराया गया है। उन्होंने कहा कि चिन्हित कमियों को चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा।


70 लाख का प्रस्ताव अब भी फाइलों में


जिला महिला अस्पताल में फायर सिस्टम को पूर्ण रूप से मानक के अनुरूप बनाने के लिए लगभग 70 लाख रुपये की आवश्यकता है। इसके लिए प्रस्ताव काफी समय पहले भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। बजट के अभाव में कई जरूरी सुधार कार्य लंबित पड़े हैं।



धुएं की सूचना मिलते ही बज उठेगा अलार्म


जिला अस्पताल में अत्याधुनिक स्मोक डिटेक्शन सिस्टम स्थापित किया गया है। किसी भी वार्ड या भवन में धुआं पहुंचते ही सेंसर सक्रिय होकर कंट्रोल रूम को सूचना देंगे। इससे आग की शुरुआती अवस्था में ही स्थिति पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से अग्निशमन तंत्र भी सक्रिय किया जा सकता है।


बिजली गुल होने पर भी नहीं रुकेगा फायर सिस्टम


अस्पताल का अग्निशमन तंत्र बैकअप पावर सपोर्ट से जुड़ा हुआ है। आग लगने की स्थिति में यदि मुख्य बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़े तो स्वतः जनरेटर या बैकअप इंजन चालू होकर फायर सिस्टम को संचालित करता रहेगा। इससे बचाव कार्यों में बाधा नहीं आएगी।


खुले तार बढ़ा रहे खतरा, नहीं हुई समुचित मरम्मत


जिला अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर विद्युत तार खुले और लटकते हुए देखे जा सकते हैं। आग की घटना के बाद भी इन्हें व्यवस्थित करने की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे तार शॉर्ट सर्किट और विद्युत दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ाते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।


सुरक्षा ऑडिट की उठ रही मांग


अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग के भीतर अस्पतालों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित जांच, रखरखाव और आपातकालीन उपयोग की तैयारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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