अयोध्या। सैन्य चिकित्सालय में आयोजित मनोरोग जागरूकता कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर (आईएडी), जिसे पहले हाइपोकॉन्ड्रियासिस कहा जाता था, एक मानसिक चिंता विकार है। इसमें व्यक्ति को बिना किसी गंभीर बीमारी के भी लगातार यह भय बना रहता है कि वह किसी गंभीर रोग से पीड़ित है।
उन्होंने बताया कि इस विकार से ग्रसित व्यक्ति शरीर में होने वाले सामान्य परिवर्तनों, जैसे दिल की तेज धड़कन, थकान, गैस, डकार, हिचकी, एसिडिटी, सिरदर्द या मांसपेशियों में खिंचाव को गंभीर बीमारी के लक्षण मान बैठता है। ऐसे लोग बार-बार चिकित्सकीय जांच कराते हैं और डॉक्टर के आश्वासन के बाद भी संतुष्ट नहीं होते। लगातार अलग-अलग चिकित्सकों से परामर्श लेने और नई-नई जांच कराने की प्रवृत्ति को ‘डॉक्टर शॉपिंग‘ कहा जाता है।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रोगों से संबंधित सामग्री पढ़कर स्वयं में उन्हीं लक्षणों का भ्रम पैदा कर लेना ‘साइबरकांड्रियासिस‘ कहलाता है। किसी अन्य व्यक्ति की बीमारी की जानकारी मिलने पर स्वयं को भी उसी रोग से ग्रसित मान लेना और अनावश्यक जांच व उपचार की ओर बढ़ना इस समस्या का सामान्य स्वरूप है।
उन्होंने बताया कि अतीत के मानसिक आघात, अत्यधिक चिंताग्रस्त व्यक्तित्व, अति-नियमवादी स्वभाव तथा आनुवंशिक कारण भी इस विकार के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। यदि समय रहते उचित मनोपरामर्श नहीं लिया जाए तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (सीबीटी) के माध्यम से नकारात्मक और भय उत्पन्न करने वाले विचारों में बदलाव लाया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से दी जाने वाली दवाएं भी मस्तिष्क के रासायनिक संतुलन को सामान्य करने में सहायक होती हैं। उन्होंने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जागरूक रहने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की। कार्यशाला का संयोजन कैप्टन प्रवेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में सैन्यकर्मियों एवं उनके परिजनों ने भाग लिया।