Thursday, July 30, 2026
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हैप्पी हार्मोन्स बढातें है स्ट्रेस-टालेरेन्स – डॉ. आलोक मनदर्शन


 अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकीय विभाग में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए साप्ताहिक दीक्षारम्भ कार्यक्रम हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. रायजादा ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माइन्ड मेंटर, जिला चिकित्सालय, अयोध्या के डॉ. आलोक मनदर्शन का स्वागत किया। संकायाध्यक्ष विज्ञान, प्रो. एस.एस मिश्र ने दीक्षारम्भ कार्यक्रम की उपयोगिता को बताते हुए। यह कहा कि सामान्य जीवन में मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत ही आवश्यक है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अपने आसपास के परिवेश में घटित घटनाओं से प्रभावित होता रहता है।

 डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि ब्रेन के तीन प्रमुख हिस्से होते हैं, जिनमे पहला प्रीफ्रंटल-कार्टेक्स है। जिसे इमोशन-कंट्रोलर दूसरा एमिग्डाला जिसे इमोशन- एक्सेलरेटर व तीसरा हिप्पोकैंपस यानि ब्रेन-लाइब्रेरी है। इस हिस्से में सभी भावनात्मक स्मृति संग्रहीत होती है। इन्ही तीनो की सॉफ्ट-प्रोग्रामिंग बिगड़ने पर स्ट्रेस-एंग्जाइटी डिसऑर्डर, मूड-डिसऑर्डर तथा साइकोसोमैटिक समस्या होती हैं। पर्सनालिटी डिसऑर्डर से जीवन में सदमे, नशाखोरी, फैमिली-प्रॉब्लम शुरू हो जाती है। मनोरोग में फैमिली-हिस्ट्री, डिजिटल-एडिक्शन, ऑनलाइन गेमिंग- गैंबलिंग की लत बन जाती है।  इमोशनल सॉफ्टवेयर के नकारात्मक हो जाने से स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसाल व एड्रीनलिन बढ़ने से घबराहट, चिड़चिड़ापन, क्रोध, ओवर थिंकिंग, नशे की तलब, अनिद्रा, नशाखोरी, पेट की गड़बड़ी व हृदय पर दबाव के लक्षण भी दिखते हैं। इस प्रकार डिजिटल व एआई- वर्ल्ड मे गोते लगाता व्यक्ति रोबोट बन मनो तनाव से ग्रसित हो रहा है। मूड हार्मोन ऑक्सीटोसिन के समुचित संचार वाली गतिविधियों जैसे रचनात्मकता, प्रकृति अवलोकन, सामाजीकरण, सेवा, एक्सरसाइज, गीत संगीत, हॉबी एक्टिविटी, मेडिटेशन व माइंडफुलनेस  के साथ सात से आठ घंटे की नीद आवश्यक है। जिससे सेल्फ अवरेवनेस, सेल्फ कंट्रोल, मोटिवेशन, सोशल स्किल्स व इम्पैथी विकसित होकर स्ट्रेस नकारात्मक रूप डिस्ट्रेस में न जाकर सकारात्मक रूप यूस्ट्रेस में बदल जाता है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक सिंह ने किया। पूर्व संकायाध्यक्ष विज्ञान एवं विभाग के प्रो. सी. के. मिश्र ने कार्यशाला में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन दिया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पी. के. द्विवेदी ने किया। मौके पर शालिनी मिश्रा, अनामिका पाठक, एम.एस.सी प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी, शोध छात्र व छात्राएं, उपस्थित रहे।

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