अयोध्या। किसी की सच्ची तारीफ करना और तारीफ पाना, दोनों ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। इससे खुशी बढ़ती है, आत्मविश्वास मजबूत होता है और आपसी रिश्तों में विश्वास बढ़ता है। वहीं, दिखावे या स्वार्थ के लिए की गई चापलूसी का असर दिमाग पर नहीं पड़ता। यह बातें जिला चिकित्सालय के मन-कक्ष में आयोजित “मनोस्वास्थ्य के संवादीय आयाम“ विषयक कार्यशाला में मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहीं।
उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति की दिल से प्रशंसा की जाती है, तो मस्तिष्क में डोपामाइन जैसे “हैप्पी हार्मोन” सक्रिय होते हैं, जिससे खुशी और प्रेरणा का अनुभव होता है। लेकिन यदि तारीफ केवल स्वार्थ या दिखावे के लिए की जाए, तो मस्तिष्क उसे वास्तविक नहीं मानता और उसका सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि केवल तारीफ पाने से ही नहीं, बल्कि दूसरों की सच्ची प्रशंसा करने से भी मानसिक संतोष मिलता है। इससे डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन, सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन जैसे रसायन सक्रिय होते हैं, जो तनाव कम करने, रिश्तों को मजबूत बनाने और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के जीवन में परिवार, मित्रों और सहकर्मियों के अच्छे कार्यों की ईमानदारी से सराहना करने की आदत विकसित करनी चाहिए। इससे संवाद बेहतर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
कार्यशाला में उन्होंने बताया कि विश्व कॉम्प्लीमेंट डे (1 मार्च) का उद्देश्य लोगों को कम से कम तीन लोगों की सच्ची और दिल से प्रशंसा करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि समाज में सकारात्मकता और आपसी सम्मान का वातावरण विकसित हो सके।