Tuesday, September 8, 2026
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अवध विश्वविद्यालय में फिल्म प्रशिक्षण कार्यशाला, छात्रों ने सीखे पटकथा लेखन और एआई के गुर


◆ रंगमंच के इतिहास से लेकर आधुनिक फिल्म तकनीक तक विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव


अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में मंगलवार को एक दिवसीय फिल्म प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग और ‘अवध चित्र साधना’, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को रंगमंच, पटकथा लेखन, सिनेमा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं भारतेन्दु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक फिल्म आयाम प्रान्त अरुण ने रंगमंच और संवाद के विकास क्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पाषाण कालीन गुफा चित्रों से शुरू हुए संचार के माध्यम से लेकर मिस्र, ग्रीक और रोमन सभ्यताओं के नाट्य इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संकट और युद्ध के दौर में मनोरंजन की आवश्यकता ने कॉमेडी नाटकों और सर्कस जैसी विधाओं को जन्म दिया।

उन्होंने शेक्सपियर के प्रसिद्ध ‘ग्लोब थिएटर’ और भारत में भरतमुनि द्वारा रचित ‘नाट्यशास्त्र’ के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कल्पनाशीलता और रचनात्मकता के साथ विषय के गहन अध्ययन पर जोर दिया।

स्क्रिप्ट राइटर एवं फिल्म निर्देशक गौतम सिद्धार्थ ने पटकथा लेखन के व्यावहारिक पहलुओं पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने कहा कि कहानी कहना मानव स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है। यथार्थ और कल्पना के संतुलन से कहानी को प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने टैगलाइन, लॉगलाइन और कैरेक्टर बिल्डिंग के माध्यम से प्रभावी पटकथा तैयार करने के सूत्र समझाए।

दूरदर्शन के पूर्व तकनीकी निदेशक जीडी मिश्र ने सिनेमा में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई से अलग रहना संभव नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को चैटजीपीटी, जेमिनी और मेटा जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल के संतुलित उपयोग की जानकारी दी। साथ ही एआई से तैयार सामग्री के फैक्ट-चेकिंग की आवश्यकता और एआई आधारित वीडियो एडिटिंग की उपयोगिता भी समझाई।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं ने फिल्म निर्माण, पटकथा लेखन और तकनीकी विषयों से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

समापन सत्र में प्रान्त अरुण ने अध्ययन की आदत विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि कल्पनाशीलता, एकाग्रता और सूक्ष्म अवलोकन क्षमता को विकसित करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन जरूरी है।

कार्यक्रम का आयोजन माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शैलेंद्र कुमार के निर्देशन में हुआ। कार्यशाला का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अयोध्या महानगर के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक हिंदी समाचार पत्र के संपादक अमित शंकर ने किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर फिल्म और डिजिटल तकनीक से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

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