Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या एमओयू के सात माह बाद भी ठप पड़ी डायलिसिस यूनिट की योजना

एमओयू के सात माह बाद भी ठप पड़ी डायलिसिस यूनिट की योजना

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इंडियन ऑयल कर रहा पहल, मेडिकल कॉलेज की सुस्ती से अटकी परियोजना


अयोध्या। गरीब मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से अयोध्या मेडिकल कॉलेज में प्रस्तावित डायलिसिस यूनिट की स्थापना अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इंडियन ऑयल और मेडिकल कॉलेज के बीच 24 मार्च को हुए एमओयू के सात माह गुजर जाने के बाद भी कार्य कागजों में उलझा हुआ है। चार करोड़ रुपये की लागत से सीएसआर फंड के तहत बनने वाली इस 10 बेड की यूनिट को लेकर कंपनी ने तेजी दिखाई है, लेकिन कॉलेज की ओर से अब तक केवल प्रक्रियाएं ही चल रही हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डा. सत्यजीत वर्मा ने बताया, “डायलिसिस यूनिट के निर्माण में मशीनों के साथ भवन संबंधी काम भी शामिल है। इसके लिए डीजीएमई से अनुमोदन लिया जा रहा है। प्रयास है कि नवंबर के अंत तक कार्य शुरू कर दिया जाए, ताकि दिसंबर तक यूनिट मरीजों के लिए शुरू हो सके।”

मामले में इंडियन ऑयल ने 15 अक्टूबर को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को ईमेल भेजकर परियोजना की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ईमेल में कंपनी ने बताया है कि मंत्रालय स्तर पर इस योजना की प्रगति को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मशीनों की स्थापना से पहले सिविल वर्क का अनुमोदन जरूरी है, जो फिलहाल प्रक्रिया में है।


लल्लू सिंह की पहल पर इंडियन ऑयल ने दिखाई थी रुचि


यह परियोजना पूर्व सांसद लल्लू सिंह की पहल पर शुरू हुई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इंडियन ऑयल प्रबंधन को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस यूनिट दान स्वरूप देने का आग्रह किया था। इसके बाद ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डा. दिनेश कुमार सिंह और इंडियन ऑयल के वी.के. पाल के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ। कंपनी ने सीएसआर फंड से चार करोड़ रुपये की लागत वहन करने की जिम्मेदारी ली थी।


डायलिसिस मरीजों की लंबी वेटिंग बनी बड़ी समस्या


फिलहाल मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस कराने के लिए मरीजों की लंबी वेटिंग बनी हुई है। गरीब मरीजों को हफ्तों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सीमित मशीनों और अधिक मरीजों के कारण अस्पताल पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसी समस्या के समाधान के लिए कॉलेज ने इंडियन ऑयल को प्रस्ताव भेजा था, ताकि सीएसआर फंड से नई यूनिट स्थापित की जा सके और गरीब मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

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