अयोध्या। दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के पैरा-3 में संशोधन की मांग उठाई गई है। इस संबंध में संगठन की ओर से ज्ञापन भेजकर धर्म आधारित प्रतिबंध समाप्त करने और पात्र दलित मुस्लिमों को अनुसूचित जाति के अधिकार एवं संवैधानिक लाभ देने की अपील की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि अनुसूचित जाति की सूची से जुड़े प्रावधानों में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं। वर्ष 1956 में सिख और वर्ष 1990 में बौद्ध धर्म के समान सामाजिक पृष्ठभूमि वाले समुदायों को एससी श्रेणी में शामिल किया गया। ज्ञापन में वर्ष 2006 की सच्चर समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई गई थी।
इसके अलावा वर्ष 2007 में न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र आयोग की ओर से दलित मुस्लिमों और दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की सिफारिश का हवाला देते हुए कहा गया कि इस दिशा में अब ठोस पहल की आवश्यकता है।
जिलाध्यक्ष अजीमुद्दीन ने कहा कि धर्म के आधार पर दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति के अधिकारों से वंचित रखना सामाजिक न्याय और समानता की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने पात्र दलित मुस्लिम समुदाय को एससी श्रेणी में शामिल कर संवैधानिक अधिकारों का लाभ देने की मांग की।
इस दौरान मंडल अध्यक्ष ताज मोहम्मद मुन्ना, जिला महासचिव मुज़म्मिल फ़िदा शाकिर वारसी, जिला उपाध्यक्ष मो. इरफान मंसूरी, मिल्कीपुर विधानसभा अध्यक्ष तौफीक हुसैन, बूथ अध्यक्ष बिस्मिल्लाह खान, नगर सचिव अबरार अहमद, जिला सचिव रज्जब अली एडवोकेट, युवा जिला अध्यक्ष मो. ज़ीशान, सोहावल ब्लॉक अध्यक्ष साहिबे आलम खान, बीकापुर विधानसभा अध्यक्ष अशोक वर्मा, वरिष्ठ नेता फरफीद सलमानी, जिला उपाध्यक्ष इरफान अंसारी, शहजाद खान, महिला जिला अध्यक्ष गुलनाज बानो सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।