Thursday, July 23, 2026
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ब्रेन-रिवॉर्ड हार्मोन, है क्रिकेट-रोमांच की टोन – डा मनदर्शन


अयोध्या। डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि टी-ट्वेंटी क्रिकेट मैच में दर्शकों का मन उत्तेजना व रोमांच उत्पन्न करने वाले मनोरसायन डोपामिन से चलायमान हो जाता है तथा ब्रेन के रिवॉर्ड-सिस्टम में डोपामिन रसायन जनित जोश व उत्तेजना से मनोआनंद तो मिलता ही है,

डा आलोक मनदर्शन

साथ ही सट्टेबाज़ी या बेटिंग के लिये भी मन उतावला होने लगता है, क्योंकि सट्टेबाजी से भी डोपामिन-जनित रोमांच प्राप्त होता है,भले ही इससे कितनी भी आर्थिक हानि हो जाय। इस प्रकार खेल के स्वस्थ मनोरंजन का स्थान विकृत व आत्मघाती रूप सट्टेबाजी या जुआखोरी के रूप में दिखने लगता है।
कम्पल्सिव-गैम्बलिंग नाम के इस मनोरोग से ग्रसित व्यक्ति के ब्रेन में डोपामिन नामक मनोरसायन की डिमांड बढ़ती रहती है, जिससे तीव्र मनोखिचाव पैदा होता है। इसलिये ऐसे लोगों को डोप-हेड भी कहा जाता है। यह एक प्रोसेस-एडिक्शन है। अन्य नशे की लत की तरह इसकी भी मात्रा बढ़ती जाती है। हाई-रिस्क कंपल्सिव-गैम्बलर्स ग्रुप में किशोर व युवा हैं।


उत्प्रेरक होते ऐप : गेमिंग व बेटिंग एप्लीकेशन के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार के उत्तेजक लुभावने सेलेब्रिटी विज्ञापन युवा मन को इस तरह मनोअगवापन की तरफ ले जा रहें हैं कि लत लगने की वैधानिक चेतावनी भी उन्हे सतर्क करने मे विफल है तथा बड़ा क्रिकेट-इवेंट रोमांचक लत की पृष्ठभूमि बन जाता है


उपचार व बचावः कम्पल्सिव गैम्बलर को प्रायः यह पता नहीं होता कि वह एक मनोरोग का शिकार हो चुका है। जागरूकता के साथ बेहैवियर ट्रेनिंग व दवाए काफी मददगार होती हैं। गैम्बलिंग ग्रुप से पर्याप्त दूरी व पारिवारिक सहयोग भी अहम होता है।

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