पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और स्वाधीनता की भावना जगाने का काम किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत को लेकर कांग्रेस का यह निर्णय बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों को वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम् भारत की अस्मिता और स्वतंत्रता संघर्ष का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों के साथ भी समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब यह समझने लगी है कि कौन राष्ट्रहित की राजनीति कर रहा है और कौन राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान कर रहा है।
महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीतिक दल और सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन राष्ट्र की अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत कभी नहीं बदल सकती। वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना का स्वर है और इसे राजनीतिक सुविधा के अनुसार सीमित करना देश की भावनाओं का अपमान है। इससे कांग्रेस की राष्ट्र विरोधी सोच उजागर हो रही है।
जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने कहा कि वंदे मातरम् करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रीय गीत है। स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रीय प्रतीकों के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए उनका सम्मान करना चाहिए। राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों के साथ किसी भी प्रकार की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती।