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फतेहगंज में टैक्स बकाया पर सील दुकान के भीतर युवती की ‘रहस्यमयी मौजूदगी’—बिल्डिंग सील, सवाल अनसील

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◆ नगर निगम बनाम दुकानदार : आठ घंटे की कैद या आठ घंटे की पटकथा?


◆ नगर निगम के पास वीडियो, दुकानदार के पास दीवार और सवालसच आखिर किसके साथ?


अयोध्या। फतेहगंज की सीलिंग कार्रवाई अब टैक्स वसूली से ज्यादा तर्कों की वसूली का मामला बन गई है। सवाल वही पुराना—अगर युवती बाहर थी तो अंदर कैसे पहुंची, और अगर अंदर नही थी तो सील खोल कर शटर उठाने पर बाहर कैसे निकली? मगर जवाब इतने हैं कि सच्चाई खुद ही रास्ता भूल जाए।

बुधवार को नगर निगम की टीम ने टैक्स बकाया को लेकर दुकान/मकान सील किया। आरोप लगा कि एक युवती को अंदर ही बंद कर दिया गया और वह करीब आठ घंटे तक “सीलिंग के साथ सील” रही। मामला तूल पकड़ते ही नगर निगम सफाई मोड में आ गया और दुकानदार आक्रोश मोड में।



नगर निगम का पक्ष


वीडियो है, युवती बाहर है, बाकी सब साजिश है


नगर आयुक्त जयेन्द्र कुमार का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमसम्मत थी और नगर निगम के पास वीडियो भी है, जिसमें युवती को बाहर आते साफ देखा जा सकता है। यानी निगम के अनुसार—“जो दिख गया वही सच है।”

निगम का दावा है कि टीम के लौटने के छह घंटे बाद अचानक युवती के कैद होने की कहानी सामने आई। आशंका जताई गई है कि पीछे के रास्ते से सीढ़ी लगाकर युवती को दोबारा अंदर पहुंचाया गया। इस ‘संभावित सीढ़ी सिद्धांत’ के आधार पर कोतवाली नगर में प्रार्थना पत्र भी दे दिया गया है।
कुल मिलाकर—निगम कह रहा है कि मामला कम और षड्यंत्र ज्यादा है।


दुकानदार का पक्ष


दीवार फांदना फिल्म में आसान है, हकीकत में नहीं


दुकानदार रिंकू गुप्ता नगर निगम के दावों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि पीछे की दीवार 20 से 25 फीट ऊंची है। उसका कहना है कि सभी गाड़ियों से टैक्स जमा कराने के लिए आए थे। हमारी दुकान सीज किया। रात में जब नगर निगम वाले आए थे, तो वह बताए कि बहन निकली थी या नहीं।

रिंकू का कहना है कि अगल-बगल सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जांच करा ली जाए। सच सामने आ जाएगा। उनका आरोप है कि नगर निगम अपनी किरकिरी से बचने के लिए अब कहानी गढ़ रहा है।

अगर इतनी लंबी सीढ़ी लगाकर कोई अंदर गया होगा, तो वह दृश्य किसी ‘एक्शन फिल्म’ से कम नहीं होता—और इतने कैमरों के बीच वह किसी की नजर से कैसे बच गया?



नया मोड़ : “दो बहनों की पहेली


अलग-बगल के दुकानदारों ने मामले में एक और ट्विस्ट जोड़ दिया है। उनके मुताबिक परिवार में दो बहनें हैं—प्रतिमा गुप्ता और प्रियंका गुप्ता।
वीडियो में प्रियंका गुप्ता बाहर आती दिख रही हैं, लेकिन प्रतिमा कहीं नजर नहीं आतीं।

अब सवाल यह है कि वीडियो में जो दिखा, वह कौन थी? और जो नहीं दिखी, वह कहां थी?
यानी मामला अब सीलिंग से ज्यादा “पहचान परेड” बन गया है—नगर निगम वीडियो दिखा रहा है, तो पड़ोसी गिनती बता रहे हैं।


नगर निगम की पुरानीपरंपराभी याद आई


वैसे यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम के प्रवर्तन दल की कार्यशैली सवालों में आई हो।
10 अक्टूबर को अयोध्या धाम में रेहड़ी-पटरी दुकानदारों से उठक-बैठक कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस घटना में किरकिरी इतनी हुई कि नगर आयुक्त को प्रवर्तन दल के तीन सदस्यों को दो माह के लिए निलंबित करना पड़ा था।

यानी सख्ती दिखाने के प्रयास में अक्सर ‘सिस्टम’ ही घुटनों के बल बैठ जाता है।


10 अक्टूबर का वायरल वीडियो


पूरे घटनाक्रम में
नगर निगम के पास वीडियो है,
दुकानदार के पास दीवार है,
पड़ोसियों के पास दो बहनों की गिनती है,
और जनता के पास सवाल।

सच क्या है, यह जांच बताएगी।
मामले की जांच उ.नि. विकास गुप्ता करेंगे।
फिलहाल इतना तय है कि

सीलिंग दुकान की कम, भरोसे की ज्यादा हुई हैऔर दोनों पक्ष अपनेअपने ताले लेकर खड़े हैं।


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