जलालपुर, अम्बेडकर नगर। सूफी संत हजरत सैय्यद मीरा मसूद हमदानी की भियांव स्थित दरगाह पर चल रहे तीन दिवसीय उर्स में विभिन्न धार्मिक आयोजनों की धूम रही। खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी देकर अकीदत का इजहार किया।
गुरुवार रात आयोजित अजमत-ए-औलिया कॉन्फ्रेंस में झारखंड से आए मौलाना मोहम्मद अंसारूल कादरी ने अपने खिताब में सूफी संतों के मिशन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूफी संतों की दरगाहें आज भी आपसी भाईचारे, प्रेम और इंसानियत का केंद्र हैं। कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता जामा मस्जिद भियांव के खतीब व इमाम मौलाना गुलाम यासीन बरकाती ने की, जबकि संचालन मौलाना इस्तेखार अहमद ने किया। कार्यक्रम भोर तक चलता रहा।
उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की गई। मिट्टी के घड़ों में लाए गए नीर शरीफ के पानी और केवड़ा जल से मुख्य मजार सहित अन्य मजारों का गुस्ल कराया गया। सज्जादा नशीन सैयद शमीम अहमद चिश्ती की सरपरस्ती में सम्पन्न हुए इस आयोजन के बाद पूरा दरगाह परिसर भीनी-भीनी खुशबू से महक उठा।
जुमा की नमाज के बाद गांव के मध्य स्थित लहदखाना से सज्जादा नशीन सैयद शमीम अहमद की अगुवाई में संदल और चादर का भव्य जुलूस निकाला गया। इससे पहले उन्होंने खिरकापोशी की रस्म अदा की, जिसकी एक झलक पाने के लिए जायरीनों का हुजूम उमड़ पड़ा। जुलूस गांव की कदीमी गलियों से होता हुआ दरगाह पहुंचा, जहां चादरपोशी के साथ इसका समापन हुआ।
इस बार उर्स में पानी की टंकी, मेडिकल सुविधा और मोबाइल शौचालय की व्यवस्था पर्याप्त न होने से जायरीनों को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ा। वहीं सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। एसओ कटका अक्षय पटेल के नेतृत्व में पुलिस बल पूरे आयोजन के दौरान मुस्तैद रहा।
इस अवसर पर दरगाह कमेटी के उपाध्यक्ष मोहम्मद मोअज्जम, गौस आलम, मोहम्मद आरिफ, अनवर, मास्टर जुनैद सहित दरगाह कमेटी के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।